
गठवाड़ी (जयपुर)। जमवारामगढ़ के रायसर श्मशान में स्थित मुसाण्या भैरू मंदिर में गुरुवार को वार्षिक लक्खी मेला भरा। इसमें लाखों भक्तों ने हाजिरी लगाई। भीड़ अधिक होने से श्रद्धालुओं को लाइन में लगकर बारी का इंतजार करना पड़ा।

उधर, बांकी माता मंदिर में भी हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेककर सुख समृद्धि की कामना की। माता का लक्खी मेला शुक्रवार को भरेगा। बांकी माता मंदिर सहित पहाड़ी पर रंग-बिरंगी रोशनी की गई है। श्रद्धालु भैरूजी एवं माता के जयकारे लगाते हुए दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

पुजारी बाबूलाल मेहरा व भैरूलाल मेहरा ने बताया कि जमवारामगढ़ पंसस समदरसी मीणा, भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रभुदयाल गुर्जर, बुद्धीजीवी प्रकोष्ठ संयोजक रामगोपाल पारीक, सरपंच प्रतिनिधि जयचंदपुरा प्रकाश मीणा, रामकिशन ध्यावणा ने भी मेले में शिरकत की। बांकी माता सेवा समिति अध्यक्ष ब्रदीनारायण मीणा ने तस्वीर भेंट की।

मुसाण्या भैरू व बांकी माता लक्खी मेले में लगी अस्थाई स्टॉल पर बच्चे, युवा एवं महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। पदयात्राओं का मंदिर कमेटी सदस्यों ने स्वागत किया। रायसर स्थित प्राचीन गणेश मंदिर में लगे झंडे का विशेष महत्व माना जाता है। परम्परा के अनुसार बांकी माता मेले से एक दिन पूर्व सप्तमी के दिन गणेश मंदिर से राजा महाराजा ध्वज की पूजा कराकर सभी मंत्री सहित मंदिर में पहुंचते थे।

इसी से मेले का आगाज माना जाता था। मेले के दिन ध्वज को वापस मंदिर में ले जाकर लगा दिया जाता था। समाज में विवादों का समाधान भी राजा महाराजा व पंच पटेल इसी झंडे के नीचे बैठकर करते थे। अब सरपंच द्वारा ध्वज का पूजन किया जाता है।