
जन्माष्टमी पर मंगलवार को हर कोई कृष्ण के रंग में ही रंगा दिखा। खासतौर पर नन्हे-मुन्ने बच्चे भी छोटे कान्हा और मनमोहक राधा-रानी की तरह सज-धज कर भगवान की भक्ति करते हुए नजर आए। माथे पर मुकुट और मोर पंख, गुलाबी गाल और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान। अपने बच्चों को कृष्ण और राधा की तैयार कर के लाए एक श्रद्धालु ने बताया शहर के बच्चों में कृष्ण और राधा हैं।

माथे पर मुकुट और मोर पंख, गुलाबी गाल और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान। अपने बच्चों को कृष्ण और राधा की तैयार कर के लाए एक श्रद्धालु ने बताया शहर के बच्चों में कृष्ण और राधा हैं।

सुबह से ही मंदिरों व गली मोहल्ले में जन्माष्टमी की झांकी बनाने में हर कोई व्यस्त था।

सभी रात 12 बजने का इन्तजार रहे थेँ जैसे ही घडियों की सुइयां एक साथ 12 के आंकड़े पर आकर मिली को तो मंदिर शंख, घडिय़ाल व झालरों से तथा जय कन्हैया लाल की जयकारों से गूंज उठे।

महाआरती के बाद पंजीरी का प्रसाद का वितरण किया गया। रात करीब एक बजे तक सभी मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रही।

भीड़ को नियंत्रण करने के लिए पुलिस प्रशासन को भी खासी मशक्त करनी पड़ी। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के अवसर पर शहर के मंदिरों में हरे कृष्णा, हरे रामा की गूंज रही और छोटे-छोटे बच्चे कृष्ण कन्हैया की पोशाक पहनकर मंदिरों में झांकी देखने आए लोगों के आकषर्ण का प्रमुख केंद्र रहे।