
दिव्यांगता नहीं, हिम्मत पहचानसजुल बताते हैं कि 2014 में 18 वर्ष की उम्र में ट्रांसमिशन लाइन पर काम करते समय ऊंचाई से गिरने से उन्होंने अपना एक हाथ और एक पैर खो दिया था। यह हादसा किसी भी व्यक्ति को मानसिक रूप से तोड़ सकता था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय जीवन को नई दिशा देने का फैसला किया।फोटो नौशाद अली

बीकानेर. झारखंड के हजारीबाग जिले के टाटीझरिया क्षेत्र के हटवे गांव निवासी 28 वर्षीय सजुल टुडू ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो शारीरिक सीमाएँ भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। एक हाथ और एक पैर नहीं होने के बावजूद वे पिछले 11 महीनों से साइकिल पर देश भ्रमण कर रहे हैं फोटो नौशाद अली

बीकानेर. झारखंड के हजारीबाग जिले के टाटीझरिया क्षेत्र के हटवे गांव निवासी 28 वर्षीय सजुल टुडू ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो शारीरिक सीमाएँ भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। एक हाथ और एक पैर नहीं होने के बावजूद वे पिछले 11 महीनों से साइकिल पर देश भ्रमण कर रहे हैं और अब तक 13,800 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुके हैं। ऐसे में वे सोमवार को बीकानेर पहुंचे.16 राज्यों का सफर, अपनी लाल-पीली साइकिल पर वे पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा सहित 16 राज्यों का सफर तय कर चुके हैं। फिलहाल वे बीकानेर से हरियाणा की ओर बढ़ने वाले हैं और उनका लक्ष्य पूरे भारत का भ्रमण करना है फोटो नौशाद अली

हर जगह मिल रहा सम्मानदेशभर में जहां-जहां वे पहुंचे, लोगों ने उनका सम्मान किया और सहयोग दिया। सजुल मानते हैं कि यही प्यार उनकी सबसे बड़ी ताकत है और इसी विश्वास के साथ वे आगे भी यात्रा जारी रखेंगे—ताकि एक दिन अपने नाम विश्व रिकॉर्ड दर्ज कर भारत का नाम रोशन कर सकें।फोटो नौशाद अली