
साक्षी के मुताबिक कूल होकर पढ़ाई करें। ध्यान न भटके ऐसी जगह की तलाश करें, लेकिन अगर ऐसी जगह न मिले तो इसे मजबूरी न बनाएं। मैं अपने घर की छत पर बैठकर झूले में झूलते हुए पढ़ती थी। इससे मुझे पढ़ाई में एक रिदम मिलती है।

साक्षी साइंटिस्ट बनना चाहती हैं। वह कहती हैं विज्ञान और अध्यात्म मिल जाएं तो दुनिया में खुशहाली ही खुशहाली हो।

साक्षी को बिंदास जीवन पसंद है। हेजीटेशन वह नहीं रखती। अपने दादा-दादी को दोस्त मानने वाली साक्षी कहती हैं, उनके अनुभव मेरे जीवन में काम आए। वे हमेशा शाबाशी देते हैं, यह शाबाशी ही मेरे लिए आशीर्वाद साबित हुई।

साक्षी सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं बाकी की गतिविधियों में भी हैं अव्वल। लिखने का शौक रखने वाली साक्षी निबंध लेखन में जीत चुकी हैं कई पुरस्कार। ऐसा कोई इवेंट नहीं स्कूल लेवल का जिसमें साक्षी न करती हों पार्टिसिपेट।

साक्षी को बागवानी का भी खूब शौक है। वह पढ़ाई में बेफिक्री के लिए कुदरत के बीच पढ़ना पसंद करती हैं। इसके लिए उन्होंने अपने घर की छत पर बागवानी कर डाली। यहीं पर साक्षी ने पढ़ाई करके हासिल किया यह मुकाम।

साक्षी पढ़ाई में ही नहीं लिखने में भी है अव्वल। उन्होंने दो किताबें लिखी हैं। एक विज्ञान पर दूसरी धर्म पर। आध्यात्मिक आनंद को महसूस करते हुए साक्षी कहती हैं लेखन मेरी रग-रग में है। अध्यात्म मेरा जीवन है।