
दमोह. बुंदलेखंड की कला को अगर अब भी कोई जीवित है तो वह है खजरी गांव यूं तो राई नृत्य रात में किया जाने वाला नृत्य है, लेकिन इस गांव में मर्यादाओं के बीच बच्चे, युवा, बुजुर्ग, युवतियां व महिलाएं एक साथ राई का आनंद उठाते है। दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाले इस आयोजन के तीसरे दिन रविवार को अपार भीड़ उमड़ी।

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दमोह. बुंदलेखंड की कला को अगर अब भी कोई जीवित है तो वह है खजरी गांव यूं तो राई नृत्य रात में किया जाने वाला नृत्य है, लेकिन इस गांव में मर्यादाओं के बीच बच्चे, युवा, बुजुर्ग, युवतियां व महिलाएं एक साथ राई का आनंद उठाते है। दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाले इस आयोजन के तीसरे दिन रविवार को अपार भीड़ उमड़ी।

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