
पटेरा ब्लॉक के देवडोंगरा में आज भी संयुक्त परिवार में लोग रह रहे हैं। जिससे इनके परिवार में 5 से लेकर 10 से अधिक सदस्य संख्या है। वह अब स्वयं फसल कटाई में जुट गए हैं। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी परिवार के सदस्यों द्वारा कटाई शुरू कर दी गई है। रीठी, बाकल क्षेत्र से आते थे मजदूर

दमोह जिले के अधिकांश किसान फसलों की कटाई रीठी, बाकल क्षेत्र से आने वाले सैकड़ों मजदूरों से ठेका पर कटाई कराते थे। लेकिन इस बार लॉक डाउन के कारण खेतिहर मजदूर जिले में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। हार्वेस्टर भी कम आने की उम्मीद

दमोह जिले में कटाई के लिए पंजाब व हरियाणा से हार्वेस्टर आते थे। लेकिन इस बार दूसरे राज्य अपने यहां से लोगों को बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। दमोह जिले में हार्वेस्टर कम हैं, जो हैं वह बड़े किसानों के यहां पहले से ही बुक हो चुके हैं। जिससे छोटे-मझौले किसानों के लिए हार्वेस्टर की उपलब्धता भी नहीं हो पाएगी।

परिवार का श्रम दान देवडोंगरा के किसान धरमपाल बताते हैं कि आधुनिक होड़ के कारण पारिवारिक सहयोग व श्रम कम हो गया था, लेकिन कोरोना के कारण पारिवारिक सहयोग अब क्षेत्र में नजर आने लगा है। इस क्षेत्र के किसान अब मन: स्थिति बना चुके हैं कि कटाई से लेकर थ्रेसिंग का कार्य स्वयं करेंगे। बाहरी मजदूरों व बाहरी व्यक्तियों से थ्रेसिंग नहीं कराएंगे। पहले दादी नानी बीनती थी सिला आधुनिकता की होड़ के पहले पारिवारिक सदस्यों के सहयोग और श्रम से ही खेत से फसल कटने के बाद अनाज घर पहुंचता था। हालांकि पारंपरिक कृषक परिवार अब भी यही इसी परंपरा का निर्वहन करने लगे हैं, लेकिन जिले में मजदूरों व हार्वेस्टर की ज्यादा उपलब्धता होने के कारण यह परंपरा टूटती जा रही थी, जो अब नजर आने लगी है। कोरोना का लॉक डाउन लौटा रहा बीता वक्त जब वाहन कम थे तो इक्का दुक्का वाहन नजर आते थे, वही स्थिति अब ढील के बाद दिखाई दे रही है। शाम को घरों में संध्या आरती की परंपरा परिवार के एक सदस्य द्वारा संभाली जा रही थी अब पूरा परिवार शामिल हो रहा है। खेती किसानी में सभी सदस्य सहयोग नहीं देते थे, कोई नौकरी कर रहा था, कोई पढ़ रहा था, लेकिन अब सभी अपने घर वापस आ गए हैं और अपना खाली वक्त परिवार के कार्यों में मदद कर रहे हैं। जिससे लोग कहने लगे है कि कोरोना के लॉक डाउन ने पुराना वक्त वापस कर दिया है।