
दरअसल बेलाताल में चारों तरफ गंदगी अटी पड़ी है। गंदगी से सराबोर इस तालाब में पानी नजर नहीं आ रहा है। जो स्थिति तालाब के भीतर है, ठीक वैसी ही स्थिति तालाब के चारों तरफ बाहरी किनारों की है। बेलाताल को पर्यटन स्थल बनाए जाने के लिए हाल ही में लाखों रुपए की राशि खर्च की गई थी, लेकिन पहले से भी अधिक दयनीय स्थिति अब नजर आ रही है।

बेलाताल की सफाई के नाम पर जनप्रतिनिधियों ने काफी वाहवाही लूटी, लेकिन श्रमदान की औपचारिकताएं निभाकर जनप्रतिनिधियों ने भी किनारा कर लिया।

बेलाताल न सिर्फ सुंदरता के लिए जाना जाता था, बल्कि यहां हनुमान मंदिर व सांईं मंदिर होने की वजह से लोगों की धार्मिक आस्था का केंद्र भी है।

बेलाताल में चारों तरफ भीतर व बाहर गंदगी ही गंदगी नजर आ रही है। आसपास के लोगों के द्वारा घरों से निकलने वाला कचरा इस तालाब में फेंक दिया जाता है। वहीं यहां स्थित मंदिरों में भगवान का पूजन अर्चन करने के बाद जो सामग्री व्यर्थ बचती है उसे लोग तालाब में फेंक देते हैं।

यहां तक देखा गया है कि लोग अपने घरों की पूजा सामग्री भी इस तालाब में लाकर पटक देते हैं, लोग यहां यह भूल जाते हैं कि तालाब का पानी नदी की तरह नहीं बहता उनके द्वारा जो सामग्री तालाब में फैंकी गई है वह गंदगी का रूप धारण कर लेगी।

यह प्रक्रिया रोजाना होने की वजह से चारों तरफ गंदगी सराबोर हो चुकी है। कुर्सियां, लाइट, गिरल गायब बेलाताल की सुंदरता को बढ़ाने व यहां पर्यटन का आनंद लेने के लिए जो लोग पहुंचे उनके आनंद और बैठक व्यवस्था के लिए कुर्सियां बिछवाईं गईं थीं, लेकिन अब यहां ऐसी व्यवस्था गायब नजर आ रही है।

भैंसो का बना दिया तबेला बेलाताल दिन के समय दर्जनों भैंसों का तबेला नजर आने लगता है। शहर के कुछ दूध डैयरी संचालक बेलाताल का उपयोग अपनी पालतू भैंसों के विचरण का क्षेत्र बनाए हुए हैं। डैयरियों से लाकर भैंसे बेलाताल में छोड़ दी जातीं हैं, भैंसे घंटों बेलाताल के पानी में रहती हैं।