
यहां पढ़ें कवि प्रदीप चौबे की कुछ खास कविताएं 1. भिखारी जनता क्लास के थ्री टायर से उतर कर हमनेबासी पूडियों का पैकेटजैसे ही भिखारी को बढायाभिखारी हाथ उठा कर बड़बड़ायाआगे जाओ बाबामैं र्फस्ट क्लास के यात्रियों काभिखारी हूँ।

यहां पढ़ें कवि प्रदीप चौबे की कुछ खास कविताएं 2. हर तरफ गोलमाल है साहब... हर तरफ गोलमाल है साहब आपका क्या ख्याल है साहब लोग मरते रहें तो अच्छा हैअपनी लकड़ी की टाल है साहब आपसे भी अधिक फले फूलेदेश की क्या मजाल है साहब मुल्क मरता नहीं तो क्या करताआपकी देखभाल है साहब रिश्वतें खाके जी रहे हैं लोगरोटियों का अकाल है साहब इसको डेंगू, उसे चिकनगुनियाघर मेरा अस्पताल है साहब तो समझिए कि पात-पात हूं मैंवो अगर डाल-डाल हैं साहब गाल चांटे से लाल था अपनालोग समझे गुलाल है साहब मौत आई तो जिंदगी ने कहा-‘आपका ट्रंक कॉल है साहब’

यहां पढ़ें कवि प्रदीप चौबे की कुछ खास कविताएं 3. रेल चलीभारतीय रेल की जनरल बोगीपता नहींआपने भोगी की नहीं भोगी एक बार हम भी कर रहे थे यात्राप्लेटफार्म पर देखकरसवारियों की मात्राहमारे पसीने छूटने लगेहम झोला उठाकरघर की ओर फूटने लगे तभी एक कुली आयामुस्कुरा कर बोला –‘अन्दर जाओगे?’हमने कहा-‘तुम पहुंचाओगे?’वो बोला –‘बड़े-बड़े पार्सल पहुंचाए हैंआपको भी पहुंचा दूंगामगर रुपए पूरे पचास लूंगा!’ हमने कहा-पचास रुपैया !’वो बोला – हाँ, भैयादो रुपए आपके,बाकी सामान के।’हमने कहा –‘यार सामान नहीं है, अकेले हम हैं।’वो बोला –‘बाबूजी, आप किस सामान से कम हैंभीड़ देख रहे हैंकंधे पर उठाना पड़ेगावैसे तो हमारे लिएबाएं हाथ का खेल हैमगर आपके लिएदायां भी लगाना पड़ेगाहाे सकता हैलात भी लगानी पड़ेमंजूर हो तो बताओ।’हमने कहा – देखा जाएगातुम उठाओ! कुली ने बजरंग बली का नारा लगायाऔर पूरी ताकत लगाकरहमें जैसे ही उठायाकि खुद बैठ गयादूसरी बार कोशिश की तो लेट गयाहाथ जोड़कर बोला –‘बाबूजी, पचास रुपए तो कम हैंहमें क्या पता था किआप आदमी नहीं, बम हैभगवान ही आपको उठा सकता हैहम क्या खाकर उठाएंगेआपको उठाते-उठातेखुद दुनिया से उठ जाएंगे!

यहां पढ़ें कवि प्रदीप चौबे की कुछ खास कविताएं 4. इनक्वायरी काउंटरइनक्वायरी काउंटर परकिसी को भी न पाकरहमने प्रबंधक से कहा जाकर –‘पूछताछ बाबू सीट पर नहीं हैउसे कहां ढूंढें? ‘जवाब मिला –‘पूछताछ काउंटर पर पूछें!’ पलक झपकते हीहमारी अटैची साफ हो गईझपकी खुलीतो सामने लिखा था –इस स्टेशन परसफाई कामुफ्त प्रबंध है!

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