3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छत्तीसगढ़ में आयोजित हुआ ‘मुत्यालम्मा कोलूपुलू’ जतरा, तेलंगाना और ओडिशा से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

Mutyalamma jathara: सैकड़ों वर्षों से चली आ रही आदिवासी आस्था और परंपरा का प्रतीक मुत्यालम्मा कोलूपुलू, जिसे शीतला माता जतारा के नाम से भी जाना जाता है, कोंटा में बड़े धूमधाम से मनाया गया।

2 min read
Google source verification
Mutyalamma jathara

Muthyalamma jatra: यह जातरा हर दो-तीन साल में एक बार होती है और कोंटा की ग्राम देवी मुत्यालम्मा (शीतला माता) की पूजा के रूप में आयोजित होती है।

Mutyalamma jathara

जतरा में छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पुरानी बस्ती स्थित माता मंदिर में भक्तों ने माता ठेका कर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजन किया।

Mutyalamma jathara

मान्यता है कि माता की शरण में जाने से दु:ख, कष्ट और बीमारियों से मुक्ति मिलती है। यह जातरा में माता अवतरण महिलाओं के द्वारा भक्तों को आशीर्वाद स्वरूप कोड़े बरसाया जाता हैं।

Mutyalamma jathara

Muthyalamma jatra: मान्यता हैं कि कोड़े बरसाने से शारीरिक मानसिक वेदनाओं से मुक्त हो जाते हैं। यह जातरा हर तीन साल में एक बार होता हैं, जिसके लिए भक्त इंतजार करते हैं।

Mutyalamma jathara

इस वर्ष भक्त मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरा होने के बाद गुड, साड़ी व चुड़ी बकरा, मुर्गा भेंट स्वरूप माता को चढ़ाया जाता हैं। इस तरह कई वर्षों से आदिवासी परंपरा जारी हैं।