
'खुद के लिए जीकर भी क्या जीना, औरों को रास्ता दिखाना भी जिन्दगी है। ऐसी ही एक मिसाल है जोधपुर की बेटी नीनू गलोत

लंदन में रहकर देश-दुनियां में हेय दृष्टि व भेदभाव रूपी तकलीफ से घिरे विटिलिगो (सफेद दाग) पीडि़तों को जिन्दादिल बनना सीखा रही है।

जोधपुर की बेटी ने विटिलिगो को दी मात, बोली ये दाग अच्छे हैं, ईश्वर के दिए दाग को दिखाने में शर्म कैसी?

झिझक को तोड़ते हुए लंदन में फैशन-फिटनेस प्रतियोगिता में भाग लिया

लंदन (ब्रिटेन) में पेशे से एन्टरप्रिन्यौर नीनू के अनुसार उसे 11 साल की उम्र में विटिलिगो हुआ।

अंग्रेजी माहौल में पढऩे-लिखने के बावजूद नीनू परिवार के सदस्यों के साथ घर और भारत आने पर हिन्दी व मारवाड़ी में ही बात करती हैं।

