
सर्किल के अंदर और सर्किल बाहर डांडिया बीट्स की धुन और युवक-युवतियों के समूह थिरकते नजर आए।

यहां गुजराती सॉंग तारा बिना श्याम मने एकलड्ड लागे..., ढोलियो ढोल रे वगाड़..., काल्यो कूद पड्यो मेला में..., समेत कई गानों की धूम रही।

सिर पर एलईडी बल्व से हेट चमकती रही। कलश और डांडिया से सजी पगडिय़ां भी दिखी।

माता के भजनों और गुजराती गीतों के अलावा हिंदी फ्यूजन के गीतों की भी धूम रही।

डांडिया महोत्सव में हर कोई अलग दिखने की चाह में नजर आया।

कुर्ता, धोती, कांचली, पगड़ी पहने भी बहुत पहुंचे।

राजस्थानी पोशाक के अलावा गुजराती और कालबेलियाई पोशाकों में युवक-युवतियां नजर आई।

इन पोशाकों में आधुनिकता की भी झलक देखने को मिली।

म्यूजिक बजता रहा, कदम थिरकते रहे।

राजस्थान पत्रिका, पान बहार और पावर्ड बाय बंसल क्लासेज प्रा. लि की ओर से आयोजित इस महोत्सव में कई तरह के पुरस्कार जीतने का मौका भी मिला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बंसल क्लासेज के निदेशक समीर बंसल थे। इस दौरान राजस्थान पत्रिका के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अजय सामर, पान बाहर के वितरक महावीर जैन और मंगल वर्धनी के चेयरमैन भी बद्रीप्रसाद गौतम मौजूद रहे।