
उन्होने कहा कि गरीबी उन्मूलन, किफ़ायती मकान और स्वच्छता तीन ऐसे बड़े मुद्दे हैं जिन्हें 4200 से भी ज्यादा शहरों और कस्बों के विकास में केंद्र में रखा गया है। दूसरे स्तर पर पेयजल और सीवरेज जैसे बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े मुद्दे हैं। इन्हें 500 शहरों में लागू किया जा रहा है और तीसरे स्तर पर 100 ऐसे स्मार्ट शहर आते हैं जहां डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से शहरी बुनियादी ढांचे और सेवाओं में इजाफा कर के नागरिक जीवन को और आसान बनाया जा रहा है। इससे देश में स्मार्ट शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

शहरी भारत की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि वैश्विक मानकों को हर हालत में निगाह में रखना होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें हर हालत में संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में काम करना होगा। उन्होने कहा कि सभी 111 शहरों में जिनमें स्मार्ट सिटी और 10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहर शामिल हैं इसी दिशा में काम हो रहा है और 15 वर्गों वाले 79 संकेतकों को सामने रखा गया है।

नगर निगम और नगर पालिका जैसी म्युनिसिपल संस्थाओं को और मजबूत बनाने पर ज़ोर देते हुए श्री पुरी ने कहा कि 11 सुधारों को लागू करने के लिए राज्यों को विशेष रूप से कहा गया है। उन्होने कहा कि 30 जून 2015 को तेज शहरीकरण के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएमएव्हाइ (यू), अमृत और स्मार्ट सिटी मिशन को शुरू किया। उन्होने कहा कि यह तीनों ही मिशन देश की आकांक्षाओं को पूरा करने वाले हैं। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बहुत बड़े स्वप्नदृष्टा हैं और शहरी भारत के विकास को लेकर उनकी एक अलग सोच है।

लोग बेहतर जीवन के लिए गांव से शहर की ओर पलायन करते हैं जहां उन्हें रोजगार मुहैया होता है और उनकी आय में इजाफा होता है तथा वे अपने और देश के विकास में मददगार साबित होते हैं। श्री पुरी ने कहा कि दो चीजें जो आम लोगों के लिए बहुत जरूरी हैं वह है आवास और रोजगार। शहरीकरण इस प्रकार का होना चाहिए जिसमें लोगों की यह दोनों ही जरूरतें पूरी हों। स्मार्ट सिटी मिशन की चर्चा करते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि इसके तहत 100 शहरों का चयन किया गया है और इनके विकास के लिए 31 करोड़ डॉलर की लागत से 5151 परियोजनाओं का प्रस्ताव है। इसमें एक-चौथाई परियोजनाओं की निविदा जारी हो चुकी है और 15 प्रतिशत पर काम भी शुरू हो गया है। शहरों को इस बात का विकल्प दिया है कि वे पुनः संयोजन, पुनर्विकास और ग्रीनफील्ड में से कोई एक मॉडल चुन सकते हैं।

90 प्रतिशत से ज्यादा शहरों ने पुनःसंयोजन के मॉडल में अपनी रुचि दर्शायी है। उन्होने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना में 48 हजार करोड़ रुपया केंद्र सरकार और इतना ही राज्य सरकारों की ओर से दिया गया था बाद में सरकारी निधि भागीदारी और कर्ज जैसे संसाधनों के जरिये 1,10,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं और शुरू की गईं। हरदीप पुरी ने कहा कि शहरों में योजनाओं को लागू करने की दिशा में एसपीवी मॉडल को अख़्तियार किया गया है।

अमृत की चर्चा करते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि 5 वर्षों के लिए यानी 2015-16 से लेकर 2019-20 तक के लिए 50 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। उन्होने कहा कि सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्टेट एनुअल एक्शन प्लान के तहत 77 हजार 640 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई जिसमें 35 हजार 990 करोड़ रुपये केंद्रीय मदद के तौर पर हैं। उन्होने कहा कि अभी तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय मदद के तौर पर 13 हजार 47 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

अमृत की चर्चा करते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि 5 वर्षों के लिए यानी 2015-16 से लेकर 2019-20 तक के लिए 50 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। उन्होने कहा कि सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्टेट एनुअल एक्शन प्लान के तहत 77 हजार 640 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई जिसमें 35 हजार 990 करोड़ रुपये केंद्रीय मदद के तौर पर हैं। उन्होने कहा कि अभी तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय मदद के तौर पर 13 हजार 47 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।