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राज्योत्सव के मंच पर छत्तीसगढ़ी रंग और सुरों की गूंज, कैलाश खेर के सुरों तक झूम उठा पंडाल, देखें

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय राज्योत्सव 2025 का समापन सांस्कृतिक रंगों और संगीत की मनमोहक प्रस्तुति के साथ हुआ।

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राज्योत्सव के मंच पर छत्तीसगढ़ी रंग और सुरों की गूंज, कैलाश खेर के सुरों तक झूम उठा पंडाल, देखें

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय राज्योत्सव 2025 का समापन सांस्कृतिक रंगों और संगीत की मनमोहक प्रस्तुति के साथ हुआ। 

राज्योत्सव के मंच पर छत्तीसगढ़ी रंग और सुरों की गूंज, कैलाश खेर के सुरों तक झूम उठा पंडाल, देखें

समापन दिवस की संध्या ने छत्तीसगढ़ी परंपरा, संगीत और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

राज्योत्सव के मंच पर छत्तीसगढ़ी रंग और सुरों की गूंज, कैलाश खेर के सुरों तक झूम उठा पंडाल, देखें

कार्यक्रम का शुभारंभ इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक पंथी-कर्मा नृत्य से हुआ। ढोल-मांदर की थाप और सामूहिक नृत्य मुद्राओं ने मंच को जीवंत बना दिया।

राज्योत्सव के मंच पर छत्तीसगढ़ी रंग और सुरों की गूंज, कैलाश खेर के सुरों तक झूम उठा पंडाल, देखें

 छत्तीसगढ़ केवल संस्कृति की धरती नहीं, बल्कि यह संगीत, संवेदना और सादगी का प्रतीक है। मुझे गर्व है कि मैं इस पवित्र भूमि के उत्सव का हिस्सा बना।

राज्योत्सव के मंच पर छत्तीसगढ़ी रंग और सुरों की गूंज, कैलाश खेर के सुरों तक झूम उठा पंडाल, देखें

छत्तीसगढ़ मया के धरती” और “अरपा पैरी के धार” जैसे गीतों के माध्यम से लोकजीवन की सादगी, करुणा और भक्ति को अभिव्यक्त किया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ झूम उठे।

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समारोह का चरम क्षण तब आया जब मंच पर पहुंचे देश के सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक कैलाश खेर। उन्होंने अपनी अनूठी आवाज़ में पिया के रंग रंग दीन्ही ओढ़नी,आदि योगी,कौन है वो कौन है वो कहां से वो आया,बुमलहरी और क्या कभी अम्बर से' जैसे गीत प्रस्तुत किए।