
आरोपों को मंत्री ने किया खारिज (photo source- Patrika)
CG Politics News: विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं होने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। इस मुद्दे को विपक्ष की विधायक कविता प्राण लहरे ने उठाया था। उन्हें सत्ता पक्ष का भी साथ मिला। विधायकों ने कहा कि बड़े अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं हो रहा है। दो पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल और अजय चंद्राकर ने भी जमकर सवाल दागे।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल इस मुद्दे पर घिरते नजर आए। इस मामले में आसंदी को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद मंत्री ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर विभागीय समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिक बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिले। उन्होंने बताया कि जनवरी तक का भुगतान कर दिया है। अभी लगभग 500 करोड़ रुपए का भुगतान बाकी है।
विधायक लहरे से ध्यानाकर्षण के जरिए इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ सही तरीके से हितग्राहियों को नहीं मिल रहा है। यही नहीं, योजना में गम्भीर बीमारियों का इलाज नहीं हो रहा है। इसके बाद भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और अमर अग्रवाल ने भी कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण योजना है। इसमें किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री को इस पर घोषणा करनी चाहिए। इस पर मंत्री ने कहा कि घोषणा की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए नियम-निर्देश की आवश्यकता पड़ती है। इस पर विधायक चंद्राकर नाराज हो गए और कहा कि निजी अस्पतालों को सरकार कोई घोषणा नहीं कर सकती इसके नियम क्या है? इसे टेबल किया जाना चाहिए।
सत्ता पक्ष के अन्य विधायकों ने भी इससे जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से रखा। इस पर सभापति ने कहा कि सभी इसके बेहतर क्रियान्वयन को लेकर चिंतित हैं। स्वास्थ्य मंत्री भी सक्षम हैं। इस पर निर्णय अवश्य लेंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सभी सदस्यों ने इस महत्वपूर्ण योजना पर ध्यान आकृष्ट कराया है। आगामी एक सप्ताह में विभागीय समीक्षा कराकर अधिक से अधिक अस्पतालों में इसका लाभ मिले इसकी पहल की जाएगी।
विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को प्रश्नकाल की शुरुआत में जंबूरी विवाद का मुद्दा गूंजा। विपक्ष के विधायकों ने इसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को घेरा। साथ ही स्काउट-गाइड के अध्यक्ष को लेकर सवाल उठाए। मंत्री यादव ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि टेंडर में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया स्काउट-गाइड के पदेन अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री होते हैं। विपक्ष मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया।
CG Politics News: प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने यह मामला उठाया। उन्होंने पूछा कि कब-कब टेंडर जारी हुआ है। जवाब में मंत्री ने दो बार टेंडर की तिथि बताई। साथ ही बताया कि स्थानीय लोगों ने कलेक्टर से मुलाकात कर टेंडर प्रक्रिया में बदलाव की मांग की थी। स्थानीय लोगों को अवसर देने के लिए टेंडर की प्रक्रिया में बदलाव किया गया। टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि टेंडर जारी होने से पहले ही निर्माण कार्य शुरू हो गया था और संरचनाएं खड़ी हो चुकी थीं।
इससे यह संकेत मिलता है कि ठेकेदार पहले से तय था। इस पर मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्काउट्स एंड गाइड्स के कार्यालय सहित कुछ संरचनाओं का निर्माण पहले किया गया था। इसका स्थानीय टेंडर प्रक्रिया से सीधा संबंध नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच के लिए विधायकों की समिति गठित करने की मांग की। मंत्री द्वारा जांच से इनकार किए जाने के बाद कांग्रेस सदस्यों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
Published on:
12 Mar 2026 08:34 am
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