
सर्वाइकल कैंसर से बचाव (photo source- Patrika)
CG HPV Vaccination: प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 14 साल तक की किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगाने की शुरुआत कवर्धा जिले से होगी। वैक्सीन चयनित अस्पतालों में लगाई जाएगी। यह अभियान तीन माह चलेगा। 12 हजार बालिकाओं को वैक्सीन लगाई जाएगी। इससे वे सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रहेंगी। डॉक्टरों के अनुसार यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और 95 फीसदी से ज्यादा सर्वाइकल कैंसर से बचाव करती है। टीकाकरण के लिए आधार कार्ड के आधार पर आयु का निर्धारण किया जाएगा।
एचपीवी वैक्सीन की सिंगल डोज (0.5 मिली) दी जाएगी। यह अभियान मेडिकल अफसर पदस्थ वाले अस्पतालों में चलेगा। वैक्सीन बायीं ऊपरी बांह में लगाई जाएगी। यह टीका गर्भावस्था अथवा खाली पेट में नहीं लगाया जाता है। टीकाकरण के बाद तर्जनी अंगुली में मार्किंग की जाएगी। टीकाकरण से पहले पालकों से सहमति ली जाएगी। यह अभियान नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से अलग संचालित किया जाएगा, जिसके लिए पृथक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
वैक्सीन लगाने के बाद हितग्राहियों को आधे घंटे तक अस्पतालों में रुकना होगा। इसके पश्चात उन्हें टीकाकरण कार्ड प्रदान किया जाएगा। कवर्धा कलेक्टर गोपाल वर्मा ने स्वास्थ्य समेत दूसरे विभाग के अधिकारियों को समन्वय स्थापित कर वैक्सीन प्रोग्राम को सफल बनाने को कहा है।
एचपीवी वैक्सीन की तीन डोज लगवाएं।
21 साल की उम्र के बाद पैप स्मीयर या एचपीवी टेस्ट करवाएं।
सुरक्षित यौन संबंध एचपीवी से बचाव करता है।
सिगरेट पीने से इम्यून पावर कमजोर होता है, इसे त्यागें।
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, पौष्टिक आहार, फल खाएं।
प्रदेश की 3 से साढ़े 3 लाख किशोरियों को सर्वाइकल (गर्भाशय का मुख) कैंसर से बचाव के लिए ह्यमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन लगाई जाएगी। इससे वे सर्वाइकल कैंसर से मुफ्त रहेंगी। भविष्य में भी ये कैंसर की बीमारी नहीं होगी। कवर्धा के बाद दूसरे जिलों में विशेष टीकाकरण शुरू किया जाएगा।
सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन के अनुसार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के सबसे ज्यादा केस आते हैं। इसका मुख्य कारण पीरियड के समय अनहाइजिन व कम उम्र में शादी है। कवर्धा सीएमएचओ डॉ. डीके तुर्रे के अनुसार देश में एक तिहाई कैंसर मरीजों की मौत सर्वाइकल कैंसर से होती है। करीब 48 प्रतिशत मामलों को समय रहते पहचान कर बचाया जा सकता है, लेकिन 50 से 60 प्रतिशत मामलों की पहचान अंतिम चरण में होती है।
Published on:
12 Mar 2026 08:15 am
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