
दीपावली करीब आते ही मार्केट में मिट्टी से निर्मित दीया व अन्य समान की दुकान सजने लगी है। मिट्टी से दीया बनाने का काम तेज हो चूका है।

दीपावली पर्व को लेकर लोगों में उत्साह नजर आने लगा है। रायपुर, भाठागांव, अमलेश्वर के कुम्हार मिट्टी के सामान तैयार करने में व्यस्त हैं।

पूजन के लिए लगने वाली मिट्टी के विभिन्न पात्र भी बना रहे है। इन दिनों सभी कुम्हार इसी काम में लगे हुए हैं।


मिट्टी के दिये, कलश आदि बनाने में दिन रात एक किए हुए हैं।

कुम्हारों के हाथ जब चाक पर थिरकने लगते हैं, तो मिट्टी भी कई आकर्षक आकारों में दीपक, गणेश प्रतिमा, लक्ष्मी प्रतिमा से लेकर कई बेहतरीन सामान स्वरूप में आ जाती है।

कुम्हारों ने मिट्टी का दीया बनाने का काम तेज किया है। कुम्हार परिवार इसमें हाथ बटा रहे हैं। रंग-रोगन के साथ ही पर्व का उत्साह देखा जा रहा है।

कुम्हारों के पसीने से आकार ले रहे दीपक दीपावली पर कई घरों को रोशन करने के लिए अभी से ही शहर और गांवों के हर कोने में मिट्टी से बनने और बिकने शुरू हो चुके हैं।

धनतेरस पर कच्चे मिट्टी के दीये, नरक चतुर्दशी पर आटे के दीये और लक्ष्मी पूजा पर मिट्टी के पके हुए नए दीये से दीप जलाने की परंपरा है।

मिट्टी के तरह-तरह दीये, लक्ष्मी गणेश सरस्वती की मूर्ति, ग्वालिन बना रहे हैं।

दीपावली के लिए कुम्हारों ने तैयारियां शुरू कर दी है। वे दीये बनाने के साथ वे मां लक्ष्मी की आकर्षक रंग बिरंगी मूर्तियां भी बना रहे हैं।