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जहां जिला और जेल प्रशासन दोनों ही अधिकारी मूकदर्शक बने जेल के बाहर खड़ी बहनों की परेशानियों को देखने के बावजूद भी नजरअंदाज करते रहे।
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यहाँ तक की चिलचिलाती धूप में अपने मासूमों को गोद में लिए कई बहनें पानी की जरूरत में बेहोश तक हो गयी। लेकिन उन बहनों ने पानी पीने के लिए अपनी लाइन नहीं छोड़ी और अपने भाइयों से मिलकर उनकी कलाही पर रक्षसूत्र बांधकर ही चैन की सांस ली।
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हालाँकि शाहजहांपुर में यह प्रथा है की जब तक बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र नहीं बाँध देती तब तक वह अपने भाई के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर देगी लेकिन पानी नहीं पियेगी।
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कई बहने घंटों तक लंबी लंबी लाइन में लगे रहने के बावजूद बेहोश होकर भी गिर पड़ी लेकिन इस सब के बावजूद उन्होंने अपने प्यारे भाई से मिलने की आस नहीं छोड़ी कई बहनें तो अपनी गोद में अपने मासूम बच्चों को लिए हुए लंबी लंबी लाइनों में घंटो तक अपनी बारी के आने का इंतजार करते रही
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हालांकि शाहजहांपुर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, और जेल प्रशासन सभी को यह मालूम था की शाहजहांपुर जिला जेल में क्षमता से 4 गुना कैदी बंद है जिन में अधिकतर कैदियों की सैकड़ों की तादाद में बहनें अपने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए जरूर आएंगी और उनके लिए तैयारियां मुकम्मल कर लेनी चाहिए थी।