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Photos : पर्यटन दिवस आज : शेखावाटी की इन हवेलियों की कारीगरी देख खींचे चले आते है विदेशी पावणे

पर्यटन दिवस आज: साल दर साल बढ़ते जा रहे देसी-परदेसी पावणे...

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सीकर/फतेहपुर/रामगढ़-शेखावाटी. दूर-दराज तक फैले रेतली धोरे। जाली झराखों की विशाल हवेलियां। लोक संस्कृति को साकार करते यहां के लोग और खान-पान का ठेठ देसी अंदाज। ऐसी ही अनेक विशेषताएं हर साल देसी-विदेशी पर्यटकों को शेखावाटी खींच आती है। शेखावाटी में इन दिनों पर्यटकों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। क्षेत्र के फतेहपुर, रामगढ़ दोनों हैरिटेज सिटी तो है मगर यहां पर पर्यटकों की सुविधाओं के लिए सरकारी स्तर पर कुछ नहीं है। यहां तक कि दोनों जगहों पर सरकारी होटल भी नहीं है ना ही कोई घूमाने की व्यवस्था है। यहीं कारण है कि दिल्ली से बीकानेर जाते समय पर्यटक यहां रूकते तो जरूर है लेकिन उत्साह थोड़ा कमजोर है।

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सबसे ज्यादा आ रहे फ्रांस सेजलवायु की गतिविधियों के मुताबिक अक्टूबर से फरवरी तक सैलानियों के लिए अच्छा समय माने जाने वाले इस क्षेत्र में सबसे अधिक विदेशी सैलानी फ्रांस से आते हैं। 2017 में फ्रांस से 15769 पर्यटक शेखावाटी आए। इसके बाद जर्मनी के 6326, इटली के 2259, ब्रिटेन के 1738 व आस्ट्रेलिया के 1137 सैलानी झुंझुनूं को निहारने यहां के विभिन्न स्थानों में पहुंचे।

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डेढ़ किलोमीटर में 125 हवेलियांरामगढ़. यहां करीब ड़ेढ़ किलोमीटर के दायरे में बनी 125 विशाल हवेलियंा, 100 मंदिर और 36 छतरियंा कस्बे के सुंदर अतीत से रूबरू कराती है। इलाके के लोगों का कहना है कि यदि सरकार पर्यटन के लिहाज से रामगढ़ में सुविधाओं में इजाफ करें तो पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।

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सीकर जिले में हवेलियों पर की गई भित्ति चित्रकारी दुनिया भर में मशहूर है। शहर में पहले लगभग दो सौ से ज्यादा हवेलियां थी लेकिन सरकारी स्तर पर सरंक्षण नहीं मिलने के कारण कई तो टूट गई व अधिकतर जर्जर अवस्था में हैं।

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इन हवेलियों की अपने आप में कई विशेषताएं होती है। नादिन ली प्रिंस फ्रांस से आकर यहां बस गई। उन्होंने यहां पर हवेलियों के सरक्षण का जिम्मा लिया।

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लेकिन सरकारी स्तर पर इन हवेलियों पर कोई बजट खर्च नहीं किया गया। ऐतिहासिक हवेलियां दुर्दशा की शिकार हो रही है।

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हवेलियों के अलावा बावड़ी व जोहड़े को भी सरंक्षण का की दरकार है। इसके अलावा रामगढ़ क्षेत्र में हिरणों का अभ्यारण भी बनाया जा सकता है।

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