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भादवे रो महीनो आयो, बाबे रो मेळो फैर आयो

बीकानेर. पैरों में बंधे घुंघरू और चेहरे पर उत्साह तथा बाबा रामदेव के जयकारे लगाते आगे बढ़ रहे पदयात्री। साथ ही जगह-जगह खाने -पीने एवं नाश्ते की व्यवस्था। यह दृश्य है 60 कोस दूर रुणिचा के बाबा रामदेव मेले में पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं के जत्थों का। बीकानेर से पैदल यात्रियों का पहला जत्था अब रवाना होगा। जबकि बाहर से आने वाले पदयात्रियों की पैदल रवानगी शुरू हो चुकी है। फोटो - नौशाद अली।

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Bhadve came crying for months, Baba came crying for fairs again

बीकानेर के लोक देवता बाबा रामदेव के प्रति अपर श्रद्धा व आस्था देखने को मिलती है दर्शनार्थी जातरुओं का हुजूम उमड़ने लगा है। रामदेवरा जाने वाले जातरू नाचते गाते और जयकारे लगाते जा रहे हैं गाँधी पार्क में पैदल यात्री रोटी बनाते, पूजा करते, भजनो पर झूमते, मेडिकल सेवा देते,। फोटो - नौशाद अली।

Bhadve came crying for months, Baba came crying for fairs again

बीकानेर. पैरों में बंधे घुंघरू और चेहरे पर उत्साह तथा बाबा रामदेव के जयकारे लगाते आगे बढ़ रहे पदयात्री। साथ ही जगह-जगह खाने -पीने एवं नाश्ते की व्यवस्था। यह दृश्य है 60 कोस दूर रुणिचा के बाबा रामदेव मेले में पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं के जत्थों का। बीकानेर से पैदल यात्रियों का पहला जत्था अब रवाना होगा। जबकि बाहर से आने वाले पदयात्रियों की पैदल रवानगी शुरू हो चुकी है। फोटो - नौशाद अली।

Bhadve came crying for months, Baba came crying for fairs again

बीकानेर भादवा माह आते ही शहर में रामदेवरा तथा अन्य देवताओं के मेलों की धूम नजर आने लगती है। इन मेलों में पैदल यात्री भी बड़ी संख्या में जाते हैं। इसके लिए न उम्र देखी जाती है और न ही पदयात्रा के रास्ते की दूरी देखी जाती है। आस्था के सामने सब गौण नजर आने लगते हैं। ऐसे ही एक रामदेवरा पद यात्री हैं श्यामसुंदर तिवाड़ी। वे गत 26 सालों से रामदेवरा पैदल जाते हैं। हर बार तो वे श्रीडूंगरगढ़ से पैदल रवाना होते हैं, लेकिन इस बार वे बाबा के प्रति आस्था दिखाते हुए दिल्ली से रामदेवरा के लिए पैदल रवाना हुए हैं। जब पहली बार पैदल गए थे तो यार-दोस्तों से पांच सौ रुपए उधार लेकर गए, लेकिन अब संपन्न होने की वजह से अपनी तरफ से सहयोग देने लगे हैं। तिवाड़ी एक सितंबर को दिल्ली से रवाना हुए थे और 11 सितंबर को श्रीडूंगरगढ़ पहुंच गए थे। यहां से वे द्वारकाधीश पैदल यात्री संघ श्रीडूंगरगढ़ में शामिल होकर 14 सितंबर को बीकानेर पहुंचे। यहां गांधी पार्क में विश्राम करने के दौरान उन्होंने बताया कि दिल्ली से पहली बार पैदल यात्रा की है। रास्ते में कोई परेशानी नहीं हुई थी और प्रतिदिन 45 किलोमीटर पैदल यात्रा कर 11 सितंबर को श्रीडूंगरगढ़ पहुंचा। यह संघ 2016 से निरंतर पैदल रामदेवरा जाता है। पहले इस संघ के जत्थे में 80 सदस्य हुआ करते थे अब इसमें 180 सदस्य हो गए हैं। फोटो - नौशाद अली।

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बीकानेर के लोक देवता बाबा रामदेव के प्रति अपर श्रद्धा व आस्था देखने को मिलती है दर्शनार्थी जातरुओं का हुजूम उमड़ने लगा है। रामदेवरा जाने वाले जातरू नाचते गाते और जयकारे लगाते जा रहे हैं गाँधी पार्क में पैदल यात्री रोटी बनाते, पूजा करते, भजनो पर झूमते, मेडिकल सेवा देते,। फोटो - नौशाद अली।