
रैली के दौरान आदिवासी कलाकारों ने कई बार सड़क को रंगशाला में तब्दील कर दिया।

पारंपरिक गीत-संगीत-नृत्य से महौल बदला और सभी का ध्यान आकर्षित किया।

रैली में आदिवासी महिलाओं ने भी उत्साह के साथ शिरकत की।

आदिवासी कलाकारों का एक दल ढोल बजाते हुए रैली को अलग ही ताल दे रहा था।