
वाराणसी. कार्तिक पूर्णिमा पर काशी में गंगा स्नान पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। सुबह से बनारस के गंगा घाट पर पैर रखने का जगह नहीं था। 3 नवम्बर की मध्य रात्रि से ही गंगा घाट पर स्नान ध्यान शुरू हो गया। कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर काशी में गंगा स्नान का अलग ही महत्व है।

कार्तिक पूर्णिमा के महास्नान का शुभ मुहूर्त 4 नवम्बर 10.52 मिनट तक ही था। लगभग 2-3 लाख श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने के लिए दूर –दूर से काशी चलकर आए हैं।

लाखों की संख्या में काशी पहुंचे श्रद्धालुओं ने बुधवार को गंगा घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई। भीड़ इतनी अधिक थी कि अलसुबह से ही शहर जाम की जद में आ चुका है।

मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरे वर्ष गंगा स्नान से वंचित रहता है, वो सिर्फ कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी से पांच दिनों कार्तिक पूर्णिमा तक गंगास्नान कर लेता है, तो उसे वर्ष पर्यंत का पुण्य लाभ मिल जाता है।

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन चार महीनों बाद भगवान् विष्णु शयन से उठते हैं और विष्णु-तुलसी विवाह के बाद से सारे मांगलिक कार्यो की शुरुआत भी हो जाती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान करने का भी बड़ा महत्त्व है। इस दिन गंगा स्नान और दान से कई पापों से मुक्ति मिलती है।