
Temple where Lord Rama did penance
सनातन धर्म के अनुसार श्री राम भगवान विष्णु के 7वें अवतार हैं। ऐसे में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के तहत 5 अगस्त भूमिपूजन किया गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त, बुधवार को सवा 12 बजे के करीब अभिजीत मुहूर्त में अयोध्या में राम मंदिर की आधार शिला गर्भगृह में रखी। बताया जा रहा है तीन से साढ़े तीन साल के अंदर मंदिर निर्माण का काम पूरा हो जाएगा।
ऐसे में आज हम आपको श्री राम से जुड़े एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं जहां रावण वध के बाद भगवान राम ने तप किया था।
दरअसल राजनीतिक सत्ता और उसके संघर्ष के चलते भारत की सीमाओं में हमेशा बदलाव होता रहा, लेकिन धार्मिक परंपराओं से भारत के एक राष्ट्र के रूप में विकास करने में आदि गुरु शंकराचार्य का बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने नवीं शताब्दी के प्रारंभ में देश के चार दिशाओं में चार धाम उत्तर में केदारनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में श्रृंगेरी मठ की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने कर, भौगोलिक सीमाओं को काफी हद तक सुनिश्चित करने के साथ ही, देशवासियों से इन चारों धामों का तीर्थाटन करने का आवाह्न किया जिससे राष्ट्रीय एकता को बल मिला।
ऐसे में देवभूमि उत्तराखंड के देवप्रयाग जहां भागीरथी और अलकनंदा नदी मिलकर गंगा का निर्माण करती हैं। इस संगम तट पर आदि गुरु शंकराचार्य ने अपने उत्तराखंड भ्रमण के दौरान लंबा प्रवास किया और इस स्थान पर ही पूर्व से भगवान श्री राम यानि रघुनाथ ने भी कठोर तप किया था,
क्योंकि उस समय वे रावण वध के बाद रावण के एक ब्राह्मण होने के कारण ब्राह्मण हत्या के अभिशाप से ग्रस्त थे। ऐसे में मुक्ति के लिए इस स्थान पर भगवान श्री रामचंद्र जी ने कठोर तप किया, यहां भगवान की मूर्ति अकेले ही है, यहां उनके साथ न सीता माता हैं, न हनुमान हैं।
लेकिन मान्यता के अनुसार हनुमान जैसे सच्चे सेवक श्री राम जी कहां साथ छोड़ते हैं। कहा जाता है कि वह भी प्रभु की इच्छा के बगैर यहां देवप्रयाग पहुंचे और जिस स्थान पर भगवान राम तपस्या में लीन थे, उनके ठीक पीछे छिप कर बैठ गए इसीलिए रघुनाथ मंदिर देवप्रयाग के ठीक पीछे हनुमान जी का मंदिर भी है।
वहीं इसके अलावा आदि गुरु शंकराचार्य ने चार धामों के अतिरिक्त 108 विश्वमूर्ति यानि ऐसे विराट मंदिरों की स्थापना की जिनके मंदिर के रूप में भगवान द्वारा स्वयं स्थापित होने की मान्यता है। उत्तराखंड में ऐसे 3 मंदिर हैं, जिनमें रघुनाथ मंदिर देवप्रयाग Raghunath Mandir Uttarakhand, नरसिंह मंदिर जोशीमठ और भगवान श्री बद्रीनाथ शामिल हैं।
कहा जाता है कि इन स्थानों पर भगवान ने स्वयं प्रकट होकर स्थान को सिद्ध किया, इन 108 मंदिरों में एक मंदिर भारत के बाहर नेपाल में मुक्तिनाथ का मंदिर है। जिसकी झील से शालिग्राम भगवान की पिंडिया निकलती है।
ऐसे समझें रघुनाथ मंदिर : Raghunath Mandir Uttarakhand
रघुनाथ मंदिर द्रविड शैली में बना है। देवप्रयाग में 11वीं शताब्दी के प्रारंभ में ही यहां विशिष्टा द्वैतवाद के जनक रामानुजाचार्य जी ने भी कुछ समय यहां रुक कर तपस्या की थी। रामानुजाचार्य जी के संबंध में कहा जाता है कि उनकी भक्ति परंपरा में रामानंद और कबीर दास जैसे संत हुए।
वहीं रामानुजाचार्य ने यहां भगवान श्री रघुनाथ जी, देवप्रयाग, संगम तथा देवभूमि उत्तराखंड के आध्यात्मिक महत्व का वर्णन करते हुए 11 पदों की रचना की। सभी पद तमिल भाषा में रघुनाथ मंदिर की दीवारों पर शिला-पट के रूप में आज भी चस्पा हैं।
देवप्रयाग एक छोटा मगर रमणीक और ऐतिहासिक कस्बा है। यहां के अधिकांश ब्राह्मण शंकराचार्य जी के साथ केरल से यहां बद्रीनाथ बद्रीनाथ की पूजा के प्रयोजन से यहां आए। जो शीतकाल में देवप्रयाग तथा ग्रीष्म में बद्रिकाश्रम में प्रवास करते हैं।
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