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टाइगर रिजर्व में जिस katrua के कारण हुई थी 29 लोगों की हत्या, वही काम फिर शुरू हो गया, जानिए क्या है कटरुआ!

पीलीभीत के जंगलों में सैकड़ों लोग कटरुआ बीनने का काम कर रहे।वनविभाग की मिलीभगत से इन्हें रोका नहीं जाता, गंभीर खतरा।व्यापारी खरीदकर ले जाते हैं और मंडियों में ऊंचे दामों पर बचेते हैं।

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katrua

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पीलीभीत। बारिश का मौसम है। ऐसे में तराई के जंगलों में कटरुआ उग आया है। इसे बीनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जंगलों में जा रहे हैं। इनमें महिला और पुरुष ही नहीं, बच्चे भी शामिल हैं। उन्हें जंगली जानवरों का भी भय नहीं है। वन्य जीव विभाग इससे मुश्किल में है। कटरुआ बीनने वालों को रोकने का दिखावा काम कर रहा है। कटरुआ का व्यापार करने वालों के आगे वन विभाग की नहीं चल पा रही है। दूसरे लोग भी कटरुआ से रुपये कमा रहे हैं। उन्हें इसका भी भय नहीं है कि कटरुआ के कारण 29 लोगों की हत्या हो चुकी है।

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क्या है कटरुआ
आगे बढ़ने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि कटरुआ है क्या? असल में कटरुआ एक प्रकार का मशरूम या कवक है। इसकी सब्जी बनाई जाती है। कहा जाता है कटरुआ बहुत पौष्टिक होता है। मानसून के समय यह सिर्फ तराई के जंगलों में पाया जाता है। कटरुआ का बाकायदा व्यापार होता है। व्यापारी 100 से 150 रुपये प्रति किलो खरीदते हैं। इसके चक्कर में सैकड़ों लोग कटरुआ एकत्रित करने का कार्य करते हैं। एक व्यक्ति पूरे दिन में 1500 रुपये तक का कटरुआ बीन लेता है।

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फ्लैश बैक
बात 1991 की है। पीलीभीत के जंगलों में सैकड़ों लोग कटरुआ बीन रहे थे। तभी जंगल में आतंकवादियों ने 29 लोगों की मौत के घाट उतार दिया था। सभी लाशें एक ही स्थान पर जमीन में गाड़ दी थीं। पुलिस ने ये लाशें बरामद की थीं। इसके बाद कटरुआ चर्चा में आया।

कहां मिलता है
पीलीभीत जिले के महोफ के जंगल में कटरुआ सबसे अधिक मिलता है। आजकल मैनाकोट मढ़ी और चोखापुरी क्षेत्र में कटरुआ बेचने वालों की मंडी लगती है। शाहजहांपुर, मैलानी और लखीमपुर खीरी के व्यापारी 150 रुपये प्रति किलो तक में खरीदारी कर रहे हैं। व्यापारी यहां से कटरुआ ले जाकर बाहर की मंडियों मे बेचते हैं। यूं तो जंगल में कटरुआ बीनने पर रोक है, लेकिन वन विभाग इसे बढ़ावा देता है। उन्हें मुफ्त में सब्जी के लिए कटरुआ मिल जाता है। वन विभाग के लोग कटरुआ बीनने वालों से बेगार भी कराते हैं। आरोप है कि कटरुआ का व्यापार करने वालों से भी वन विभाग के कर्मचारियों की सांठगांठ रहती है।

कटरुआ नहीं बीनने देंगे
इस बीच टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन का कहना है कि कटरुआ बीनने वालों पर सख्ती की जाएगी। उन्हें जंगल में आने से रोका जाएगा। इसके लिए संयुक्त टीम का गठन किया गया है। जंगल के साथ-साथ बाजारों में भी कटरुआ बेचने वालों की निगरानी की जाएगी। कटरुआ जब्त किया जाएगा। कटरुआ बीनने का काम नहीं करने देंगे। उनका कहना है कि कटरुआ बीनने से मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष होता है।

चार लोग हिरासत में लिए गए
टाइगर रिजर्व को उपनिदेशक आदर्श कुमार का कहना है कि मंगलवार को फैक्ट्री रोड पर कटरुआ बेचने पर चार लोगों को हिरासत में लिया गया। 30 किलोग्राम कटरुआ बरामद किया गया। पकड़े गए आरोपी ग्राम गायबोझ (थाना सुनगढ़ी) के हैं। इन सबके खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा है कि कोई भी व्यक्ति जंगल की ओर न आए। साथ ही व्यापारियों को चेतावनी दी है कि वे कटरुआ का व्यापार बंद करें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।