
पीलीभीत। जिलाधिकारी शीतल वर्मा के तबादले के बाद जिले में कई तरह की चर्चाएं हैं। चर्चा है कि उन्होंने स्वंय अपना तबादला करवाया है या जिले के चारों विधायकों में से किसी ने। यहां के चारों भाजपा विधायक जिलाधिकारी की संयुक्त शिकायत मुख्यमंत्री से कर चुके थे लेकिन जिलाधिकारी की मजबूत पैठ और केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी के आशीर्वाद के चलते कोई उन्हें डिगा नहीं पाया।
लेकिन अब पीलीभीत की जिलाधिकारी शीतल वर्मा के तबादले के बाद भाजपा नेताओं में खुशी देखी जा रही है। यहां की जिलाधिकारी एक तो महिला थीं और दूसरे वो किसी नेता की सुनती नहीं थीं। उनसे केन्द्रीय मंत्री तो खुश थीं लेकिन स्थानीय विधायक और भाजपा के नेता नाराज थे। सूत्रों की मानें तो जिलाधिकारी ने एक नेता से कहा था कि जब तक मैं खुद नहीं चाहूंगी तब तक मेरा तबादला नहीं होगा।
सभी भाजपा नेता कर चुके शिकायत
जिलाधिकारी के इस बयान के बाद जिले के सभी भाजपा नेता व विधायक परेशान हो गये थे। यहां तक कि भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने तो विधानसभा में प्रश्न भी लगाया था लेकिन उनका वो प्रश्न खारिज कर दिया गया था। सभी चारों विधायकों ने मुख्यमंत्री से लेकर जिले के प्रभारी तक जिलाधिकारी की शिकायत की लेकिन कुछ कर नहीं पाये। जिलाधिकारी शीतल वर्मा मजबूती से अपनी सीट पर जमी रहीं और काम करती रहीं। यहां तक कि पार्टी संगठन ने भी कई बार लिखित शिकायत की थी लेकिन केन्द्रीय मंत्री मेनका संजय गांधी का आशीर्वाद उन्हें मिला हुआ था और मुख्यमंत्री सचिवालय में उनकी अच्छी पैठ थी।
जिलाधिकारी शीतल वर्मा के तबादले के बाद चारों विधायक और भाजपा नेता खुशियां मना रहे हैं। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि जिलाधिकारी ने स्वयं सीतापुर अपना तबादला कराया है ताकि वह लखनऊ के नजदीक रह सकें।
गोमती के फर्जी उद्धार की रिपोर्ट पर गिरी गाज
हाल ही में पीलीभीत में लखनऊ में बहती गोमती नदी के जनसहयोग उद्धार की एक रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी गयी थी। जिसके बाद शासन ने प्रदेश की छह नदियों को चिहिन्त किया था जिसमें पीलीभीत के गोमती उद्गम स्थल को भी रखा गया था। प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह स्वंय पीलीभीत आये थे और उन्होंने जनसहयोग की मांग रखी थी। इस सम्मेलन में जिलाधिकारी ने एक प्रोजैक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की थी और गोमती नदी के उद्गम स्थल पीलीभीत को फलदायी बनाने की बात कही। गौरतलब है कि सिंचाई विभाग के माध्यम से बनायी गयी इस रिपोर्ट में गोमती नदी के उद्गम स्थल पर किसी भी अतिक्रमण का जिक्र नहीं किया गया। न ही यह बताया गया कि अतिक्रमण से गोमती यहां सिकुड़ चुकी है। यह सभी तथ्य मंत्री से छिपाये गये थे। हो सकता है कि यह भी कारण रहा हो क्योंकि मीडिया में जनसहयोग कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी व सिंचाई विभाग के खिलाफ चर्चाएं रहीं।
सभी नेताओं ने साधी चुप्पी
जिलाधिकारी शीतल वर्मा के तबादले की खबर के बाद सभी भाजपा के नेतागण वाह वाही लूट रहे हैं लेकिन जब मीडिया ने प्रश्न किया तो चुप्पी साध ली।
बीते दिनों वकीलों के भी किया था जिलाधिकारी का विरोध
संयुक्त बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने भी केन्द्रीय मंत्री मेनका संजय गांधी का पुतला कलेक्ट्रेट गेट पर दहन किया था और कैबिनेट मंत्री मेनका गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी। वकीलों का आरोप था कि एडीएम न्यायिक विनोद कुमार गौड़ का तबादला गैर जनपद में जनवरी माह में हो जाने के बाद भी जिलाधिकारी उन्हें रिलीव नहीं कर रही हैं। अधिवक्ताओं की मेनका से शिकायत के बाद भी अपने पद पर जमे अधिकारी को रिलीव नहीं करने पर भी अधिवक्ता काफी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुये मेनका का पुतला दहन किया था, जिसके बाद आज अचानक तबादले की खबर आ गयी। माना जा रहा है कि पुतला दहन होने के बाद मेनका ने अपने लोगों से सम्पर्क किया और बाद में मुख्यमंत्री से कहकर जिलाधिकारी को हटवाया क्योंकि जिलाधिकारी किसी से ठीक से बात नहीं करती थीं। कलेक्ट्रेट परिसर में भी आज वकील उनके तबादले की खबर के बाद बहुत खुश नज़र आये।
Published on:
18 Mar 2018 05:17 pm
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