
Parali
पीलीभीत। प्रदेश सरकार ने पराली को जलाने के मामले को गंभीरता से लिया है। वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिये शासन ने इस मामले में सभी जिलाधिकारियों को इस मामले को गंभीरता से लेने के निर्देश दिये हैं। जिलाधिकारी ने वीडियो कांफ्रेसिंग के बाद जिले की पांचों तहसीलों में लेखपालों को फिर से जांच कर पराली जलाने वाले किसानों की सूची तैयार करने के निर्देश दिये है। इधर एक लेखपाल पर पराली जलाने वाले किसान को नोटिस दिलाये जाने के बजाय उससे धनराशि प्राप्त करने के मामले में डीएम ने एसडीएम को जांच के आदेश दिये है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो किसाना पराली इसलिए जला रहे है कि उसका निस्तारण करने में काफी लागत लगती है जो जलाने के बाद पड़ने वाले जुर्माने कहीं बहुत ज़्यादा है।
मुख्य सचिव ने की वीसी
बीती शाम प्रदेश के मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये पराली की समस्या की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिये कि जिस जिले में पराली जलाने वालों के खिलाफ नरमी बरती गई उनके खिलाफ कडी कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के इस आदेश को गंभीरता से लिया जाए। प्रदेश की समीक्षा के दौरान सर्वाधिक मामले सेटेलाइट के माध्यम से 754 मथुरा में पाये गए। जबकि सेटेलाइट ने पीलीभीत में तीन स्थानों पर पराली जलने की पुष्टि की। यह पिछली समीक्षा में पीलीभीत में सेटेलाइट ने 600 से अधिक मामले सामने आये थे। जिले में 140 मामलों में नोटिस जारी किये गए है।
जिलाधिकारी ने दिए जांच के आदेश
जिलाधिकारी डॉ0 अखिलेश मिश्र ने वीडियो कांफ्रेसिंग के बाद पांचों तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह सभी लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्र में भेज कर उनसे पराली जलाने वाले किसानों की सूची तैयार करायें और उनको नोटिस जारी किये जाएं। इधर जिलाधिकारी ने बताया कि उनकी ओर से लगातार कार्यवाई की जा रही है और अबतक 4 हज़ार रूपये का जुर्माना वसूला जा चुका है। पराली जलने की जहां से भी शिकयत मिलती है उसे लेखपाल के माध्यम से नोटिस दिए जा रहे है। वहीं किसानों का कहना है कि सरकार उन्हे पराली नहीं जलाने का विकल्प दे, सरकार को इसके निस्तारण के लिए कोई योजना बनानी चाहिए।
Published on:
04 Nov 2018 01:18 pm

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