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सरकार के आदेश के बाद भी नहीं मिल रहे शव वाहन, पीलीभीत पुलिस ने एक रिक्शे वाले को दिया शव ‘ठिकाने’ लगाने का ठेका

अभी हाल ही में सरकार ने आदेश दिया था कि किसी भी सूरत में शव रिक्शे पर लाद कर ले जाने की अनुमति नहीं होगी, शव वाहन दिया जाएगा।
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पीलीभीत

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Amit Sharma

•

Updated: 23 May 2018, 7:36 PM IST

 Unclaimed dead body

सरकार के आदेश के बाद भी नहीं मिल रहे शव वाहन, पीलीभीत पुलिस ने एक रिक्शे वाले को दिया शव 'ठिकाने' लगाने का ठेका

पीलीभीत। सरकार के आदेश के बाद भी शव वाहन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। पीलीभीत में लावारिश लाशों को ढोने का जिम्मा एक रिक्शेवाले को सौंप रखा है। एक रिक्शा चालक अकेले ही अपने बाजुओं के दम पर रिक्शे पर लाश लादता है और ठिकाने लगा देता है। इस दौरान दूर-दूर तक आपको कोई सरकारी मुलाजिम देखने को नहीं मिलेगा। सही मायने में यह जिम्मा सरकारी मुलाजिमों के कंधों पर है।

पुलिस देती है खर्चा

विडियो में देखिये किस तरह यह रिक्शा चालक पीलीभीत के पोस्टमार्टम हाउस से लावारिश शव लेकर पांच किलोमीटर दूर मुक्तिधाम लेकर जाता है। कभी-कभी यह शव लेकर पीलीभीत के रेलवे स्टेशन पर भी पहॅंच जाता है और वहाॅं शव को काफी देर घुमाने के बाद आगे बढ़ता है। आपको यह बता दें कि लावारिश शवों को पीएम के 72 घण्टे बाद पुलिसकर्मियों द्वारा अन्तिम संस्कार कराने का जिम्मा है लेकिन पुलिस कुछ पैसा रिक्शा चालक को देकर अपना फर्ज पूरा कर लेती है। रिक्शे वाला शव को मुक्तिधाम पहुंचा देता है और वहां एक समाजसेवी अरूण दास चंचल द्वारा उनका अपने खर्च पर अन्तिम संस्कार किया जाता है। वहीं पुलिस अधीक्षक बीबी सिंह का कहना है कि लावारिश शवों को वो 72 घन्टे तक रखते हैं कि शायद कोई उसका उत्तधिकारी आ जाये जब कोई नहीं आता तो पुलिस उनका अन्तिम संस्कार कराती है।

आपको यह जानकर बड़ा आश्चर्य होगा कि पोस्टमार्टम हाउस से लेकर मुक्तिधाम तक का ठेका शहर के एक रिक्शेवाले मंगल को पुलिस ने दिया है। उसने बताया कि वो 72 घन्टों के बाद पुलिस द्वारा बुलाया जाता है जिसके बाद वो शव की पूरी पैकिंग करता है और अकेले ही मुक्तिधाम तक जाता है। इन सब काम के लिये उसे पुलिसकर्मी 800 रूपए देते हैं।

क्या कहना है सीएमओ का

वहीं सीएमओ का कहना है कि अगर पुलिसकर्मी उन्हें बता दें तो वह शव वाहन को भेजकर लावारिश शव को मुक्तिधाम पहुंचवा देंगे। वहीं अन्य मामलों में भी पोस्टमार्टम हाउस आ रहे शवों की बुरी दुर्दशा है। पीएम हाउस पर स्टाफ न होने से मृतकों के परिजन खुद शवों को उठाकर पीएम के लिए कमरे में लेकर जाते हैं। कुल मिलाकर पीलीभीत में शवों को लेकर जो लापरवाही बरती जा रही है, वह मानवता को शर्मसार करती है।