
पीलीभीत में मौत पर बवाल | Image Video Grab
Pilibhit Murder Case: पीलीभीत शहर के एक प्रभावशाली प्रॉपर्टी डीलर के कार्यालय में कर्मचारी की संदिग्ध हालात में मौत के बाद माहौल गरमा गया। मृतक अनिल का शव कार्यालय परिसर में फांसी के फंदे से लटका मिला, लेकिन घटना के करीब 30 घंटे बीत जाने के बावजूद शहर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। पुलिस की इस निष्क्रियता से नाराज परिजन और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताने लगे।
मृतक के परिजनों का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है। उनका कहना है कि अनिल पिछले कुछ समय से मानसिक दबाव में था और कार्यालय में उसके साथ दुर्व्यवहार की आशंका भी जताई जा रही थी। परिजनों ने सीधे तौर पर प्रॉपर्टी डीलर वेद प्रकाश कश्यप की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। परिवार का दावा है कि अनिल को फांसी पर लटकाया गया ताकि सच्चाई सामने न आ सके।
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 30 घंटे तक तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आरोपी प्रॉपर्टी डीलर के रसूख के कारण पुलिस दबाव में काम कर रही थी। पीड़ित परिवार ने जब थाने में कार्रवाई की गुहार लगाई, तो उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा। इससे जनता में यह सवाल उठने लगा कि क्या कानून केवल आम लोगों के लिए है और रसूखदारों के लिए अलग नियम हैं।
पीड़ित परिवार अपनी फरियाद लेकर पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस पहुंचा, जहां उन्होंने राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार से न्याय की गुहार लगाई। मंत्री ने जब मौके पर शहर कोतवाल से देरी का कारण पूछा, तो कोतवाल सत्येंद्र कुमार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक एफआईआर न दर्ज करने की दलील दी। इस जवाब से मंत्री बेहद नाराज हो गए और उन्होंने इसे कानून की भावना के खिलाफ बताया। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध हो तो तत्काल मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
मंत्री के सख्त तेवर देखकर मौके पर ही पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव मिश्रा को गेस्ट हाउस बुलाया गया। मंत्री ने एसपी से कहा कि ऐसी कार्यप्रणाली पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचा रही है और इससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है। उन्होंने दो टूक कहा कि शहर कोतवाल की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है और उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाना चाहिए। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
राज्य मंत्री के इस आदेश के बाद जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के मुताबिक अब प्रॉपर्टी डीलर वेद प्रकाश कश्यप की भूमिका की गंभीरता से जांच शुरू की जाएगी। पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। जिले में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि मंत्री हस्तक्षेप न करते तो शायद मामला और लंबा खिंच जाता।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या आम नागरिक को न्याय पाने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप का सहारा लेना जरूरी है। एक कर्मचारी की मौत पर समय रहते एफआईआर दर्ज न होना पुलिस तंत्र की संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर रसूखदारों के दबाव में पुलिस काम करती रही, तो न्याय व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा टूटता चला जाएगा।
Published on:
14 Feb 2026 10:16 pm
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