
बाघों की आबादी दोगुनी करने के लिए पीलीभीत रिजर्व को मिला ग्लोबल अवार्ड, 4 साल में ही दुगनी तेजी से बढ़ी संख्या
पीलीभीत. पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) ने 13 देशों को पीछे छोड़ते हुए ग्लोबल अवार्ड हासिल किया है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय टीएक्स-2 के पुरस्कार से नवाजा गया है। ये पुरस्कार कम समय में बाघों की दोगुनी करने के आधार पर दिया गया है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व और राज्य के वन विभाग ने 10 साल की जगह चार साल में ही बाघों की आबादी दोगुनी करके पहली बार अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार टीएक्स-2 हासिल किया है। देश की 13 टाइगर रेंज में ये पुरस्कार पाने वाला पीटीआर पहला टाइगर रेंज है। इस उपलब्धि के बाद टाइगर रिजर्व से जुड़े कर्मचारियों, अधिकारियों और वन्यजीवों में उत्साह है। पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने कहा है कि यहां बाघों का संरक्षण और वृद्धि संबंधित अन्य संस्थाओं के सहयोग से ही संभव हो सकी है। ये सभी की कोशिशों का ही नतीजा है। वहीं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व को बधाई दी है। बता दें कि 2014 में यहां 25 बाघ थे जो कि 2018 में 65 हो गए।
यहां बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए चार जून 2014 में पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। उस दौरान पूरे जंगल में टाइगरों की कुल संख्या 25 थी। टाइगर रिजर्व बनने के बाद जंगल में बाघों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइड लाइन पर कार्य किया गया। उसी का रिजल्ट रहा कि जब साल 2018 में प्राधिकरण ने यहां बाघों की गिनती कराई तो चार साल में ही बाघों की संख्या 25 से बढ़कर 65 होने की बात सामने आई।
13 देशों को पछाड़ कर बना नंबर वन
पीटीआर ने 13 देशों को पछाड़ कर नंबर वन की पोजीशन हासिल की है। नेपाल भूटान, भारत, रूस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि में मॉनीटरिंग के बाद ये तय हुआ है कि भारत में सबसे तेजी से बाघों की संख्या अगर कहीं बढ़ी है तो वो पीलीभीत जिला है। इसलिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल अवॉर्ड देने का फैसला किया गया।
वर्चुअल समारोह में बताया नंबर वन
पीटीआर को वर्चुअल समारोह में नंबर वन की उपाधि दी गई है। दरअसल, यूनाइटेड नेशनल डवलपमेंट प्रोग्राम यानि यूएनडीपी और इंटरनेशनल यूनीयन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर यानि आईयूसीएन की तरफ से आयोजित एक वर्चुअल समोराह में पीलीभीत के टाइगर रिजर्व को नंबर वन बताया गया है। यह संस्था बाघों पर किए जाने वाले काम और उनकी देखरेख के सिलसिले में किए जा रहे प्रयासों को देखती है।
Updated on:
25 Nov 2020 09:26 am
Published on:
25 Nov 2020 09:26 am
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