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गुजरात में नाखुश 20 भाजपा विधायक, नौकरशाही को लेकर रूपाणी सरकार की कार्यशैली से नाराज

विधायकों का आरोप है कि राज्य में 'बाबू राज' चल रहा है, जिसका बुरा असर विकास पर पड़ रहा है। हालांकि नाराज विधायकों ने कहा है कि वे मंत्री या सरकार से नाराज नहीं हैं, बल्कि अधिकारियों से नाराज है।

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Vijay Rupani

गुजरात में नाखुश 20 भाजपा विधायक, नौकरशाही को लेकर रूपाणी सरकार की कार्यशैली से नाराज

अहमदाबाद। भारतीय जनता पार्टी के लिए पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार चुनौतियां पेश कर रहा गुजरात एक बार फिर चिंता की लकीरें खींच रहा है। अब सत्ताधारी पार्टी के तीन विधायकों ने नौकरशाही पर आरोप लगाते हुए खुलेआम सरकार के कामकाज पर सवाल उठा दिए हैं। विधायकों का आरोप है कि राज्य में 'बाबू राज' चल रहा है, जिसका बुरा असर विकास पर पड़ रहा है। हालांकि नाराज विधायकों ने कहा है कि वे मंत्री या सरकार से नाराज नहीं हैं, बल्कि अधिकारियों से नाराज है। लेकिन विधायकों के इस कदम को रूपाणी सरकार के खिलाफ बगावत माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के ठीक एक दिन बाद और मुख्यमंत्री रूपाणी की अनुपस्थिति में हुई है।

...नाराज विधायकों ने लगाए ये आरोप

- राज्य नेतृत्व विधायकों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहा है।
- अफसरों से मुलाकात के लिए भी इंतजार करना पड़ता है।
- जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकारी अधिकारी जवाब भी नहीं देते हैं।

...ये हैं तीनों विधायक

विजय रूपाणी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों में वाघोड़िया की विधायक मधु श्रीवास्तव, सावली विधायक केतन ईमानदार और मांजलपुर के विधायक योगेश पटेल शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों ने मीडिया के सामने अपनी बात कहने से पहले बंद कमरे में गहन मंथन किया था। विधायकों का दावा है कि पार्टी के 20 और विधायक नाराज हैं। गौरतलब है कि 182 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के 99 विधायक हैं। जबकि बहुमत के लिए कम से कम 92 विधायक जरूरी हैं। ऐसे में 20 विधायकों की नाराजगी चिंता का विषय है।

लगातार विवाद से परेशान पार्टी आलाकमान

गौरतलब है कि राज्य में पहले मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान हुआ था फिर उपमुख्यमंत्री पद को लेकर नितिन पटेल की नाराजगी सामने आई थी। कश्मकश स्थिति में मिली चुनावी जीत को देखते हुए पार्टी संगठन भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। लेकिन लोकसभा चुनाव और तीन अहम राज्यों में विधानसभा चुनावों से ऐन पहले ऐसे विवाद राज्य से लेकर केंद्र तक के लिए चिंता का विषय बन रहे हैं।