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17 साल के शासन में 44 मंत्री हटा चुके हैं नवीन पटनायक

बीजद सरकार में मंत्रियों की बर्खास्तगी या मंत्रियों को विभिन्न आरोपों में हटाकर फेरबदल कोई नया नहीं है।
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नई दिल्ली

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Prashant Kumar Jha

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Updated: 23 Dec 2017, 6:20 PM IST

naveen pathnaik, pathnaik cabinet

भुवनेश्वर: मुखयमंत्री नवीन पटनायक बीजद सरकार के 17 साल के कार्यकाल में अब तक 44 मंत्रियों को उनके पदों से हटा चुके हैं। दामोदर राउत की बर्खास्तगी के बाद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना से इंकार कर दिया। कृषि विभाग का प्रभार वित्तमंत्री शशिभूषण बेहरा को सौंप दिया है। पटनायक का कहना है कि राउत की बर्खास्तगी के बाद फेरबदल की कोई संभावना नहीं है। बीजद सरकार में मंत्रियों की बर्खास्तगी या मंत्रियों को
विभिन्न आरोपों में हटाकर फेरबदल कोई नया नहीं है। दामोदर राउत से पहले भी मंत्री निकाले जा चुके हैं लेकिन उसके पीछे बड़बोलापन वजह न होकर भ्रष्टाचार प्रमुख कारण रहा। दामोदर राउत पार्टी हाईकमान की नाराजगी का शिकार पहली बार नहीं हुए हैं। पहले भी वह ऐसे राजनीतिक संकट के दौर गुजरते रहे हैं। अन्य मंत्रियों को समय और ठोस सबूत के आधार पर हटाया जा चुका है। नवीन पटनायक ने अपनी साफ-सुथरी छवि से कोई समझौता नहीं किया।

4 साल में 6 मंत्री मंत्रिमंडल से बर्खास्त

बीजू जनता दल की सरकार के 2000-2004 के दौरान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने छह मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। इनमें कमला दास, प्रशांत नंदा, नीलकंठ महंति, अमर प्रसाद सत्पथी, देवी प्रसाद मिश्रा व एपी सिंह प्रमुख थे। इसके अलावा तत्कालीन वित्तमंत्री रामकृष्ण पटनायक को न केवल अपना पोर्टफोलियो खोना पड़ा बल्कि बाद में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद सन 2004 से 2009 के बीच मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 14 मंत्रियों के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों में अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की।

इन्हें भी पटनायक के गुस्से का होना पड़ा है शिकार

पटनायक ने अपने तीसरे कार्यकाल में मंत्रियों को हटाने के बड़े फैसले लिए थे। मई 2012 में नवीन सरकार के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी उन्हीं के खास पूर्व सांसद प्यारी मोहन महापात्र (अब दिवंगत) द्वारा फूंके जाने से एक बारगी पटनायक थोड़ा परेशान दिखे पर उन्होंने चेहरे से जाहिर नहीं होने दिया। हालांकि उस समय मुख्यमंत्री पटनायक लंदन में थे। इस प्रकरण में प्रफुल गढ़ई, प्रफुल सामल, प्रताप जेना, पुष्पेंद्र सिंह देव व अतानु सव्यसाची नायक जैसे ओहदेदार विधायकों को उनके प्यारीमोहन महापात्र से संबंध होने के कारण मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के गुस्से का शिकार होना पड़ा था। इन लोगों को गद्दार और पीठ में छुरा घोंपने वाला तक कहा गया। फिर भी अतानु सव्यसाची नायक व पुष्पेंद्र सिंहदेव नवीन का दिल जीतने में कामयाब रहे।

सव्यसाची नायक से लिया गया इस्तीफा

सन 2014 में नवीन पटनायक ने इन्हें अपनी सरकार में मंत्रिपद दिया। बाद में प्रफुल सामल व प्रतापजेना को भी मंत्रिमंडल में स्‍थान मिल गया। पटनायक के चौथे कार्यकाल में अतानु सव्यसाची नायक को सम अस्पताल अग्निकांड के बाद स्वास्थ मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। यह घटना अक्तूबर 2016 को हुई थी। इसके अलावा और आठ मंत्रियों से त्यागपत्र ले लिया गया। इनमें से प्रदीप अमात को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री दामोदर राउत के समय समय पर आने वाले विवादित खासकर ब्राह्मण विरोधी बयानों के कारण उन्हें नवीन पटनायक ने बर्खास्त कर दिया।