
क्या है चारा घोटाला !
शुरू में दो करोड़ रुपए के गबन से शुरू होकर यह मामला 900 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा। अंतिम रूप से अब भी यह कहना मुश्किल है कि यह घोटाला कितने रुपयों का है क्योकि तत्कालीन सरकारों ने हिसाब रखने भारी गड़बड़ियां की थीं ।
बिहार पुलिस ने 1994 में राज्य के चाईबासा, देवघर, गुमला, डोरंडा, लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिए करोड़ों रुपए की कथित अवैध निकासी के मामले दर्ज किये । कोषागार और पशुपालन विभाग के सैकड़ों कर्मचारी गिरफ़्तार कर लिए गए। कई ठेकेदारों और पशुपालन विभाग को माल सप्लाई करने वाली पार्टियों को भी हिरासत में लिया गया । उस समय संयुक्त बिहार में दर्जन भर आपराधिक मुक़दमे दर्ज किए गए।
विपक्षी दलों की मांग थीं कि घोटाले के विस्तार और राजनीतिक मिली-भगत की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए । सीबीआई ने मामले की जांच का दायित्व संयुक्त निदेशक यूएन विश्वास को सौंपा। उन्होंने शुरुआती जांच के बाद कहा कि मामला बहुत पेचीदा है जिसमें सघन जांच की जरुरत है।सीबीआई ने कहा कि चारा घोटाले में शामिल सभी बड़े अभियुक्तों के संबंध राष्ट्रीय जनता दल और अन्य पार्टियों के शीर्ष नेताओं से रहे हैं और उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि गबन किये गए पैसों का हिस्सा नेताओं की झोली में भी गया है.
कैसे हुई धन की निकासी
तत्कालीन पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पशुओं के चारे, पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के लिए करोड़ों रुपए के फ़र्जी बिल कोषागारों से वर्षों तक कैश कराये। राज्य के नियत्रक और लेखा परीक्षक ने इसकी जानकारी राज्य सरकार को समय-समय पर भेजी थी लेकिन बिहार सरकार ने इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया। घोटाला प्रकाश में आने के बाद हुई जांच के बाद पता चला कि ये सिलसिला वर्षों से चल रहा था।
जांच का फंदा लालू यादव के गले तक
पहले अधिकारियों और राजयस्तरीय कुछ नेताओं पर गाज गिरी लेकिन आते आते बात तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तक जा पहुंची। मामले में फंसे लालू यादव को इस सिलसिले में जेल तक जाना पड़ा। साथ-साथ आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में सीबीआई ने राबड़ी देवी को भी अभियुक्त बनाया। सीबीआई का कहना था की लालू यादव को न सिर्फ़ इस मामले की पूरी जानकारी थी बल्कि उन्होंने कई मौक़ों पर अवैध धन निकासी को मंजूरी भी दी। बताते चलें की लालू यादव उस दौरान रात्ज्य के वित्त मंत्री भी थे। इस सिलसिले में बिहार के एक और पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र को गिरफ़्तार किया गया. राज्य के कई वर्तमान और भूतपूर्व मंत्री भी गिरफ़्तार किए गए। लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ सीबीआई ने आरोप पत्र दाख़िल कर दिया जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा और बाद में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने तक वे कई महीनों तक जेल में रहे।
लालू यादव की मुश्किलों का दौर
चाईबासा के दो मामलों लालू यादव को पांच-पांच साल की सजा हो चुकी है। देवघर मामले में लालू यादव को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
दुमका मामले में लालू यादव दोषी करार दिए जा चुके है। इस मामले में 23 मार्च को सजा सुनाई जाएगी | इसके अतिरिक्त डोरंडा केस अदालत में विचाराधीन है ।
Published on:
19 Mar 2018 04:04 pm
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