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सदन में विश्वास मत की जीत से गदगद हुए अमित शाह, कामयाबी को बताया 2019 की झलक

सदन में विश्वास मत की जीत से गदगद हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, बोले ये तो 2019 की झलक भर है।

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सदन में विश्वास मत की जीत से गदगद हुए अमित शाह, कामयाबी को बताया 2019 की झलक

नई दिल्ली। मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन में अविश्वास प्रस्ताव के दिन भर राजनीति बयानों बीच जमकर ड्रामेबाजी भी हुई। आखिरकार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभिभाषण के बाद सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान शुरू किया गया। नतीजा वहीं हुआ जिस पर पहले से ही सभी को यकीन था। बस देखना ये था कि विपक्ष कितने वोट बंटोर पाता है। सदन में विश्वास मत जीतने के बाद भाजपा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। देर रात भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर डाले। शाह ने इस मुकाबले को 2019 की झलक बता दिया।


सदन में 12 घंटे तक हुई चर्चा के बाद एनडीए सरकार ने विश्वास मत जीत लिया। इस दौरान 451 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। इसमें 126 वोट अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़े जबकि 325 वोट इसके विरोध में डाले गए। जीत की खुशी से गदगद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक के बाद एक चार ट्वीट किए इनमें उन्होंने इस जीत को 2019 की महज एक झलक बता डाला।


अमित शाह ने लिखा कि यह मोदी सरकार और उनके मंत्रियों की जीत है। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के नतीजे लोकतंत्र की जीत और परिवारवाद की हार है। शाह ने कहा कि सदन में अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ एनडीए सरकार को मिले समर्थन ने कांग्रेस के वंशवाद की राजनीति, नस्लवाद और तुष्टीकरण को उजागर कर दिया है।


शाह ने परिवारवाद को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा..अविश्वास प्रस्ताव में मोदी सरकार की जीत लोकतंत्र की जीत और परिवारवाद की हार है। आज फिर परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण की जनक कांग्रेस ने देश की जनता द्वारा चुने एक गरीब परिवार में जन्मे आम व्यक्ति के प्रधानमंत्री बनने के प्रति अपनी नफरत और अस्वीकार्यता को पुनः प्रमाणित किया है।


शाह ने विपक्ष पर जमकर तंज भी कसे। उन्होंने कहा, संख्या बल न होने के बावजूद कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जो उनके राजनीतिक दिवालियापन को दर्शाता है।आपको बता दें कि 4 साल में पहली बार मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लिया गया। टीडीपी और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, लेकिन उनका ये कदम उनपर ही भारी पड़ गया।