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‘अगर अभिषेक को किसी ने रोका तो खून-खराबा होगा’, ममता के भतीजे को धमकी मिलने के बाद बोली TMC

Bengal Election 2026: टीएमसी की राज्यसभा सांसद ममता बाला ठाकुर ने कहा- अगर कोई अभिषेक बनर्जी को ठाकुरनगर में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश करता है, तो खून-खराबा होगा।

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TMC सांसद अभिषेक बनर्जी (Photo-IANS)

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में मटुआ समुदाय के दो गुटों के बीच हालिया झड़प के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। आगामी 9 जनवरी को TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रस्तावित दौरे को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर हिंसा की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, टीएमसी सांसद ठाकुरनगर स्थित हरिचांद ठाकुर और गुरूचांद ठाकुर के मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले हैं।

बनर्जी के दौरे का विरोध कर रही बीजेपी

बता दें कि अभिषेक बनर्जी के इस कार्यक्रम का BJP सांसद शांतनु ठाकुर, जो बोंगांव से सांसद हैं और मटुआ-बहुल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, के नेतृत्व वाला मटुआ समुदाय का एक धड़ा विरोध कर रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अभिषेक बनर्जी भारी पुलिस बल के साथ ठाकुरनगर आए तो मटुआ समुदाय उन्हें प्रवेश नहीं करने देगा। 

उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान TMC नेता अभिषेक बनर्जी को मटुआ समुदाय के प्रति एकजुटता दिखाने की कोई जरूरत नहीं है।

TMC के राज्यसभा सांसद ने किया पलटवार

बीजेपी सांसद के इस बयान पर टीएमसी की राज्यसभा सांसद ममता बाला ठाकुर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अभिषेक बनर्जी को ठाकुरनगर में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश करता है, तो खून-खराबा होगा। 

वहीं, मटुआ महासंघ के महासचिव सुकेश गाइन ने अभिषेक बनर्जी को रोकने के बयान पर विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि ठाकुरबाड़ी सभी मटुआ समुदाय के लोगों के लिए है, जहां हजारों श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर किसी की निजी संपत्ति नहीं है और यदि कोई अभिषेक बनर्जी को ठाकुरबाड़ी आने से रोकेगा तो उसका कड़ा विरोध किया जाएगा।

किस कारण मटुआ समुदाय में फैली नाराजगी

बता दें कि इससे पहले बीजेपी सांसद शांतनु ने कहा था कि यदि एक लाख मटुआ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं तो समुदाय को यह बलिदान सहन करना चाहिए, क्योंकि इससे कथित रूप से कई ‘अवैध’ मुस्लिम मतदाताओं के नाम भी हटेंगे। इस बयान से मटुआ समुदाय में गहरी नाराजगी फैल गई और चुनाव से पहले राजनीतिक टकराव तेज हो गया।