
डूब गया आंध्र का 'चंद्र', ओडिशा में फिर 'नायक' बने पटनायक
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के साथ-साथ आज चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम भी घोषित हो रहे हैं। जिन चार राज्यों में विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होंगे, उनमें आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं। अब तक के रुझानो में लोकसभा चुनाव में एनडीए एक बार फिर पूर्ण बहुमत की ओर है। वहीं, विधानसभा चुनाव परिणाम में सबसे बड़ा उलटफेर आंध्र प्रदेश में होने जा रहा है। आंध्र में तेलुगू देशम पार्टी का 'चंद्र' डूब रहा है और वहां वाईएसआर कांग्रेस का उदय होना लगभग तय है। वहीं, ओडिशा में एक बार फिर नवीन पटनायक की वापसी हो रही है। भाजपा यहां कमल खिलाने में कामयाब नहीं हो सकी।
सबसे पहले एक नजर डालते हैं आंध्र प्रदेश विधानसभा पर
| आंध्र प्रदेश विधानसभा | कुल सीटें | बहुमत |
| 175 | 88 |
आंध्र प्रदेश विधानसभा परिणाम के आंकड़ों के मुताबिक, YSR कांग्रेस ने 145 से ज्यादा सीटों पर लीड कर रही है। जबकि, टीडीपी 25 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है।
TDP बनाम YSR
आंध्र प्रदेश में सीधा मुकाबला तेलुगू देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच है। आंध्रप्रदेश विधानसभा की 175 सीटों के लिए 11 अप्रैल को 79.88% मतदान हुआ था। यह 2014 से करीब 1% ज्यादा था। राज्य में करीब 3.13 करोड़ मतदाताओं ने 2118 प्रत्याशियों के लिए वोट दिए। 2014 के चुनाव में आंध्रप्रदेश में टीडीपी सरकार आने की बड़ी वजह कांग्रेस के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी और पार्टी के राज्य को विशेष दर्जा दिलाने जैसे वादे थे। लेकिन, बीच में टीडीपी एनडीए से अलग हो गई और वाईएसआर कांग्रेस ने चुनाव के दौरान इस मुद्दे को जमकर उछाला। वाईएसआर के साथ टीआरएस का गठबंधन होने पर चंद्रबाबू नायडू ने बिरयानी और सूप का मुद्दा भी उठाया था। चुनाव प्रचार के दौरान नायडू ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव के उन बयानों की जमकर चर्चा की, जिसमें उन्होंने उन्होंने आंध्र प्रदेश की बिरयानी और कुल्थी की दाल के सूप का मजाक उड़ाया था। राव ने 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों में कहा था कि हैदराबादी बिरयानी की तुलना में आंध्र प्रदेश की बिरयानी का स्वाद गाय के गोबर जैसा होता है। उनके इस बयान का आंध्र प्रदेश में काफी विरोध भी हुआ था। हालांकि, इस सबके बावजूद टीडीपी जनता का रिझाने में नाकामयाब रही और आंध्र में उनकी नैया पूरी तरह डूब गई।
एक नजर ओडिशा विधानसभा पर
| ओडिशा विधानसभा | कुल सीटें | बहुमत |
| 147 | 74 |
ओडिशा में एक बार फिर नवीन पटनायक की वापसी होने जा रही है। पतकुड़ा सीट पर बीजेडी प्रत्याशी बेद प्रकाश अग्रवाल की मौत के बाद चुनाव टाल दिया गया था। ओडिशा विधानसभा की 146 सीटों के लिए चार चरणों में 73.83% मतदान हुआ था। यह पिछले चुनाव से करीब आधा फीसदी ज्यादा था। 2014 में 73.9 मतदान हुआ था। बीजेडी 80 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है और माना जा रहा है कि पटनायक पांचवी बार ओडिशा के मुख्यमंत्री बनेंगे।
BJD-BJP-CONG के बीच मुकाबला
ओडिशा में बीजेडी, बीजेपी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणात्मक मुकाबला है। कांग्रेस का राज्य में खिसकता आधार बीजेपी के लिए फायदा बनता जा रहा है। हालांकि, नवीन पटनायक अब भी राज्य में सबसे लोकप्रिय नेता हैं, लेकिन अब उन्हें अपनी पार्टी में ही असंतोष की सुगबुगाहट का सामना गाहे-बगाहे करना पड़ता है। इसे हवा देने में बीजेपी का हाथ होने के ही कयास लगाए जाते हैं। ओडिशा का अनुभव बताता है कि नवीन पटनायक की मजबूत मुख्यमंत्री की छवि का मुकाबला नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री के तौर पर मजबूत छवि हुआ। हालांकि, चुनाव के दौरान बीजेपी ने पटनायक को घेरने की काफी कोशिश की। पार्टी ने केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को ओडिशा की पूरी जिम्मेदारी दी। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओडिशा में कई रैलियां और रोड शो की, लेकिन पटनायक के नींव को नहीं हिला सके। इस तरह नवीन पटनायक एक बार फिर ओडिशा के 'नायक' बनने जा रहे हैं।
Published on:
23 May 2019 01:38 pm
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