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अनिल विज बोले: देशभक्ति का मंदिर है आरएसएस, विरोधी नेताओं को लगता है इस मंदिर से डर

आरएसएस एक राष्‍ट्रवादी संगठन है। इसलिए संघ के साथ देश के सभी लोगों को जुड़ना चाहिए।

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Dhirendra Kumar Mishra

Sep 17, 2018

anil vij

अनिल विज बोले: देशभक्ति का मंदिर है आरएसएस, विरोधी नेताओं को लगता है इस मंदिर से डर

नई दिल्‍ली। हरियाणा के कैबिनेट मंत्री और भाजपा के बड़बोले नेता अनिल विज ने एक बार फिर विरोधी दलों के नेताओं के खिलाफ कटाक्ष किया है। उन्‍होंने कांग्रेस सहित कुछ अन्‍य दलों के नेताओं को अपने निशाने पर लेते हुए कहा कि आरएसएस देश भक्ति का मंदिर है और मंदिर में भूत पिशाच कभी नहीं आते। उनको मंदिर से डर लगता है। शायद इसलिए कुछ लोग आरएसएस के मंथन शिविर में जाने का विरोध कर रहे हैं। उन्‍होंने ये बयान संघ शिविर में शामिल नहीं होने वाले नेताओं के खिलाफ नहीं दिया है।

संघ से सभी को जुड़ने की जरूरत
इससे पहले मई में उन्‍होंने आरआरएस को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्‍होंने कहा कि आरएसएस एक राष्‍ट्रवादी संगठन है। राष्‍ट्रहित संघ की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रहता है। इससे संघ समझौता नहीं करता। इसलिए इस संगठन के साथ देश के सभी लोगों को जुड़ना चाहिए। उन्‍होंने ये भी कहा था कि संघ से जुड़ने पर देश की कई समस्याओं का समाधान हो खुद ब खुद हो जाएगा ।

संघ का विरोध कोई नई बात नहीं
आपको बता दें कि संघ की स्थापना 27 सितंबर, 1925 को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। आरएसएस भारत का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना जाता है। शहर और गांव मिलाकर करीब 83 हजार स्थानों पर संघ की शाखा, साप्ताहिक मिलन और संघ मंडली लगती हैं। इस समय संघ की करीब 59 हजार शाखाएं काम कर रही हैं। इनके अलावा 24,500 साप्ताहिक मिलन और संघ मंडली सक्रिय हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश भर में एक करोड़ से ज्यादा प्रशिक्षित स्वयंसेवक हैं जो संघ के अनुशासन और नियमों के दायरे में सामाजिक और सांस्‍कृतिक तौर पर सक्रिय हैं। इसके बावजूद संघ के कई विचारों से विरोधी दलों के नेता सहमत नहीं है। यही कारण है कि संघ के कार्यक्रमों को लेकर विवाद होता रहता है। विरोधी दल के नेता पार्टी लाइन के अनुसार समय-समय पर उसका समर्थन या विरोध करते रहते हैं।