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एक और जमीन घोटाला : दो संस्थाओं ने बेची सरकारी जमीन

सरस्वती नगर व बैंक कॉलोनी अध्यक्ष पर पर होगा धोखाधड़ी का केस, सर्वे क्रमांक 1053 की सरकारी जमीन पर काटे 51 प्लॉट।  

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धार

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Hitendra Sharma

Dec 25, 2021

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धार. शहर में जमीन अफरा-तफरी कर बेचने का नया घोटाला सामने आया है। कलेक्टर कोर्ट ने बुधवार को कर्मचारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित सरस्वती नगर धार व बैंक कॉलोनी के अध्यक्षों पर धारा-420 व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज करने एसडीएम धार को आदेश दिए हैं। इसके तहत कॉलोनी के लिए सर्वे क्रमांक-1051 पर लीज दी गई थी, लेकिन संस्थाओं द्वारा भूमि सर्वे क्रमांक-1053 पर प्लॉट काटकर बेच दिए। भूमि सर्वे क्रमांक-1053 की करीब 30 हजार वर्ग फीट से अधिक जमीन पर 51 लोगों को प्लॉट आवंटित कर दिए गए।

इन पर अधिकांश प्लॉट पर वर्तमान में मकान बन चुके हैं, कुछ जानकारी के अनुसार एसडीएम की ओर से यह प्रकरण जांच के बाद भेजा गया था। 16 जनवरी-20 को प्रभारी अधिकारी भू-अभिलेख के प्रतिवेदन के बाद संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए। इसका जवाब पेश हुआ, हिस्सा खुला है, इस पर भी लोगों का कब्जा है। कलेक्टर कोर्ट के आदेश के तहत सरकारी जमीन की अफरा-तफरी करने के मामले में सरस्वती नगर व बैंक कॉलोनी के अध्यक्षों पर एफआइआर करवाए जाने के लिए कहा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई के लिए प्रकरण कलेक्टर कोर्ट भेज दिया गया। लंबी सुनवाई और संस्थाओं की ओर से प्राप्त जवाबों की समीक्षा और जांच के बाद बुधवार को कलेक्टर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

यह है मामला
सरस्वती नगर कर्मचारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित सरस्वती नगर को वर्ष-1980-81 में ग्राम नौगांव स्थित भूमि सर्वे नंबर-1054 में से 4 लाख 49 हजार 163 वर्गफीट व ग्राम जैतपुरा के सर्वे नंबर-57 में से 40 हजार 837 वर्गफीट जमीन आवंटित की गई | संस्थान द्वारा शासकीय भूमि सर्वे नंबर-1053 नजूल भूमि पर प्लॉट काटकर विक्रय किए। वर्तमान में संस्था के पास 4.840 हेक्टेयर यानी 4 लाख 90 हजार वर्गफीट से अधिक भूमि कब्जे में है। संस्था को आवंटित लीज में से 0.288 हेक्टेयर जमीन पर 31 लोगों को प्लॉट वितरित किए गए।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंककर्मचारियों की संस्था ने वरजुबाई पति दीपा की भूमि सर्वे नंबर-1051 में से 71 हजार 216 वर्गफीट यानी 0.661 हेक्टेयर कॉलोनी भूमि स्थायी लीज पर ली थी। तत्कालीन अध्यक्ष प्रवीण कुमार शुक्ला ने लीज प्राप्त की। साथ ही भूमि पर कॉलोनी विकास की अनुमति लेकर 8 फरवरी 1990 को प्लानिंग स्वीकृत करवाई। इसके बाद 26 दिसंबर 90 को समिति अध्यक्ष शुक्ला ने लीज डीड करवाई। यहां भूमि रजिस्ट्री के जरिए क्रय की जाना थी।