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MP Election 2023: भाजपा-कांग्रेस ने नहीं समझी किसानों के मन की बात, गायब हो गए ये मुद्दे

madhya pradesh election 2023 - प्रदेश के किसानों की अपेक्षा पर कांग्रेस-भाजपा का मेनिफेस्टो नहीं उतरा खरा...

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भोपाल

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Manish Geete

Nov 16, 2023

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कृषि प्रधान राज्य मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में किसानों के मुद्दे गायब हैं। कांग्रेस हो या भाजपा किसानों की अपेक्षा पर दोनों ही दलों का मेनिफेस्टो खरा नहीं उतरा। दोनों के घोषणा-पत्रों में किसानों के मन की बात नहीं समझी गई। किसान कह रहे हैं कि गेहूं के समर्थन मूल्य को लेकर दोनों पार्टियों ने बाजीगरी दिखाई है।

कांग्रेस ने वचन-पत्र में 2600 रुपए तो भाजपा ने संकल्प-पत्र में 2700 रुपए गेहूं का समर्थन मूल्य देने की घोषणा की है, लेकिन कब से यह नहीं बताया। कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में किसान कर्ज माफी की बात कही लेकिन स्पष्ट नहीं किया कि उनके हिसाब से कौन से किसान इसके हकदार होंगे। इसकी गणना कैसे होगी और कब से इसे लागू किया जाएगा।

उधर, भाजपा ने तो कर्ज माफी पर कुछ कहा ही नहीं है, जबकि किसानों को उम्मीद थी कि काफी चिंतन के बाद घोषणा-पत्र लाया जा रहा है, इसलिए कुछ न कुछ तो होगा। इसके अलावा भी बहुत कुछ था जो जरूरत या फिर समस्याओं के रूप में लंबे समय से अन्नदाता परेशान थे, उनको लेकर घोषणा-पत्र में शामिल किया जा सकता था, लेकिन इस पर भी हताशा ही हाथ आई। खेती को मुनाफे का सौदा बनाने की बातें ही होती आ रही हैं। हकीकत में सरकार को जो पहल करनी चाहिए, उस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ये छह मुद्दे घोषणा-पत्रों में देखना चाहते हैं किसान

किसान चाहते हैं कि कृषि आदानों (बीज, खाद, कीटनाशक और मशीनरी) पर लगने वाले टैक्स को नियंत्रित किया जाए। प्रदेश में मशीनरी, पेस्टिसाइड पर अभी 18 प्रतिशत तो खाद-बीज पर 08त्न टैक्स लागू है। इस कारण ये महंगे मिलते हैं, जो किसान की जेब पर बोझ डालते हैं। जैविक खेती में उपयोग आने वाली दवाइयों पर कम, केमिकल आधारित पेस्टिसाइड पर ज्यादा टैक्स लगता है।

प्रदेश के बाजारों में नकली खाद, बीज, दवाई की भरमार है जो किसान की कमर तोड़ रहे हैं, इसको लेकर कड़े नियम बनाने की मांग उठती रही लेकिन इसे भी किसी पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र में प्राथमिकता नहीं दी।

डीजल का उपयोग किसान ट्रैक्टर से लेकर बिजली के सिंचाई पंप में इस्तेमाल करते हैं। इस पर अभी 38त्न टैक्स लगता है। किसान चाहते थे कि दोनों ही दल अपने घोषणा-पत्रों में इसकी कीमतों को लेकर कोई योजना लागू करते। डीजल के लिए क्रेडिट कार्ड बनाया जा सकता था।

किसानों को कहना है कि भाजपा ने घोषणा-पत्र में 2700 रुपए पर तो कांग्रेस ने 2600 रुपए समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की घोषणा की थी, लेकिन दोनों ने तारीख नहीं बताई। ये कब से होगा, किसान ये जानना चाहता है। पूर्व में बंद की गई भावांतर योजना जिसमें समर्थन मूल्य से नीचे फसल बिकने पर अंतर की राशि सरकार देती थी, इसको घोषणा-पत्र में ला सकते थे।

उद्यानिकी फसलों सब्जी, फल, फूल, औषधीय पौधों की खेती से लेकर मोटा अनाज और जैविक फसलों की खरीदी के लिए योजना की दरकार है, जिस पर किसी पार्टी ने कोई घोषणा नहीं की है। विभाग की प्रेरणा और एक-दूसरे की देखा-देखी किसान नवाचारी खेती करते तो हंै, लेकिन समर्थन मूल्य और मंडी में बिक्री की व्यवस्था न होने के कारण हाथ पीछे खींच लेते हैं।

राजनीतिक दलों ने अपने-अपने घोषणा-पत्रों में किसानों के लिए लोकलुभावन वादे तो किए, लेकिन समय-सीमा को गोलमोल कर दिया। किसानों की समस्याओं और जरूरतों को लेकर कोई दीर्घकालीन योजना पर ध्यान नहीं दिया गया। जिस भी पार्टी को किसानों का विश्वास हासिल होगा, उसकी सरकार बनने पर वह उनके हित में निर्णायक कदम उठाएगी, इसकी अपेक्षा है।

-राहुल धूत, प्रांत प्रचार प्रमुख, मध्यभारत प्रांत, भारतीय किसान संघ

बैंकों से लेते हैं कर्ज, लेकिन सरकार नहीं मानती

सरकार उन्हें कर्जदार किसान मानती हैं, जिन्होंने सहकारी बैंकों या समितियों से ऋण लिया है, जबकि आजकल किसान राष्ट्रीयकृत और निजी दोनों बैंको से ऋण लेते हैं। सहकारी बैंकों के कर्ज से किसान नहीं दबता है, क्योंकि उसमें 0 प्रतिशत ब्याज लगता है। छह-छह माह का समय मिलता है, पुनर्भुगतान की। जबकि बैंकों में 40 दिन से अधिक का समय नहीं मिलता तो ब्याज दर भी 14 से 16त्न तक होती है। इस स्थिति को लेकर किसान लंबे समय से सरकारों को ध्यान दिलाते रहे हैं लेकिन किसी ने योजना नहीं बनाई। ये बड़ी परेशानी है।

सभी दलों के मेनिफेस्टो में लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य को शामिल करना चाहिए। आदान और कृषि यंत्रों पर तो किसी तरह का टैक्स ही नहीं होना चाहिए। जैविक खेती को प्रोत्साहित करने सरकार को किसानों को कुछ पारितोषिक देना चाहिए।

-बिहारी साहू, श्री अन्न (मोटा अनाज) आयाम प्रमुख, महाकौशल