
डूसू में एबीवीपी की जीत का फायदा लोकसभा के चुनाव में उठाने की कोशिश में भाजपा, उत्साहित
नई दिल्ली : दिल्ली यूनिवर्सिटी में जबरदस्त जीत हासिल करने पर भाजपा में खुशी की लहर है। उसे लगता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ का चुनाव जीत लेने के बाद वह 2019 लोकसभा चुनाव में एक बार फिर 2014 लोकसभा का करिश्मा दोहरा सकती है। उसकी यह उम्मीद इसलिए भी जगी है, क्योंकि जहां आम आदमी समर्थित छात्र संघ ‘छात्र युवा संघर्ष समिति’ (सीवाइएसएस) का सूपड़ा साफ हो गया है, वहीं भाजपा समर्थित छात्र संघ एबीवीपी को जबरदस्त सफलता हाथ लगी है। वह इस जीत का प्रचार इस तरह से कर रही है कि आज भी युवाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बरकरार है, जबकि अरविंद केजरीवाल की गिरी है। इसलिए एक बार फिर दिल्ली में 2014 का करिश्मा दोहराया जा सकता है।
सभी पार्टी की नजर इस पर थी
बता दें कि पिछले चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआइ को अध्यक्ष व उपाध्यक्ष दोनों पदों पर जीत मिली थी, जबकि इस बार उसे सिर्फ सचिव पद पर जीत मिली है। वहीं एबीवीपी ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद पर कब्जा जमाया है, जबकि पिछली बार वह अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर हार मिली थी। इस वजह से भाजपा इसे अपनी लोकप्रियता की वापसी के तौर पर देख रही है। बता दें कि इस बार आप की छात्र इकाई ‘छात्र युवा संघर्ष समिति’ (सीवाइएसएस) भी चुनाव मैदान में थी और सभी डूसू का चुनाव जीतकर लोकसभा चुनाव से पहले इसे मनोवैज्ञानिक बढ़त की तौर पर देख रही थी। बता दें कि यह माना जाता है कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली के युवाओं का जबरदस्त समर्थन हासिल होने की वजह से ही वह पिछली विधानसभा चुनाव में इतनी जबरदस्त जीत हासिल कर पाई थी, लेकिन डूसू के चुनाव में उसे एक भी सीट न मिलने के बाद भाजपा समेत अन्य दल इसे इस तरह से प्रचारित कर रही है कि अब आम आदमी की चमक फीकी पड़ गई है और युवाओं में एक बार फिर भाजपा का क्रेज लौट रहा है। यही कारण है कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के चेहरे पर एक बार फिर रौनक लौट रही है।
Published on:
14 Sept 2018 06:57 pm
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