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बजट सत्र : लोकसभा में हंगामे के कारण नहीं चली सदन, बुधवार 11 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित

Highlights: विपक्षी दलों के सांसदों ने मंगलवार को भी जमकर हंगामा किया बीजेपी ने सदन में कांग्रेस के हंगामे को विपक्ष की पैंतरेबाजी बताया सरकार बहस के लिए तैयार, बशर्ते विपक्ष सदन में शांति बहाली का वादा करे

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लोकसभा का मानसून सत्र 167 प्रतिशत उत्पादकता के साथ सबसे अधिक उत्पादकता वाला सत्र रहा।

नई दिल्ली। बजट सत्र के दूसरे दिन भी लाेकसभा में हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही नहीं चली।विपक्ष के रुख काे देखते हुए लाेकसभा अध्यक्ष ने बुधवार 11 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। इससे पहले दिल्ली हिंसा को लेकर लोकसभा में विपक्षी दलों के सांसदों ने मंगलवार को भी जमकर हंगामा किया। इससे दूसरे दिन भी सदन की कार्यवाही नहीं हाे पाई । इससे पहले, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की विपक्षी सांसदों से जमकर बहस हुई।
लोकसभा में प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने दिल्ली हिंसा पर चर्चा कराने की मांग की। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सरकार से पूछा कि क्या दिल्ली हिंसा से बढक़र कुछ और महत्वपूर्ण है। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है। अध्यक्ष जो भी व्यवस्था देंगे, सरकार उसके अनुसार कार्य करेगी।
इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को हुए घटनाक्रम को जोड़ते हुए कहा कि एकदूसरे की बेंच की तरफ बढऩे वाले सांसदों को निलंबित किया जाएगा। बिरला ने सदन में प्ले कार्ड लाने पर रोक की व्यवस्था दी, तो विपक्ष के सांसद हंगामा करने लगे। बिरला ने विपक्षी सांसदों से पूछा कि क्या वे प्ले कार्ड लाकर संसद चलाना चाहते हैं। अगर ऐसा है तो इसकी घोषणा करें। इस पर विपक्षी सांसद हंगामा करने लगे, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

संसद में सरकार और विपक्ष के बीच की तनातनी का असर संसद के दूसरे दिन के काम पर भी पड़ सकता है। मंगलवार को भी विपक्ष जहां दिल्ली दंगों के मुद्दे पर सरकार को संसद में घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार ने भी तय कर लिया है कि जब तक पूरी तरह शांति स्थापित नहीं हो जाती, तब तक चर्चा नहीं करवाई जाएगी। विपक्ष शांतिपूर्ण तरीके से सदन की कार्यवाही को चलने देने के लिए तैयार हो जाएगा तभी गृह मंत्री अपना बयान रखेेंगे।

सरकार के इस रुख के बावजूद सोमवार से शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे हिस्से में गतिरोध जल्द समाप्त होता नहीं दिख रहा है। सोमवार को विपक्ष के दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही। साथ ही लोकसभा में दोनों पक्षों के सांसदों के बीच धक्का-मुक्की तक हो गई।

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कांग्रेस नहीं कर रही विपक्षी एकजुटता की पहल

विपक्षी दलों की ओर से सरकार को घेरने का एक बड़ा मौका होने के बावजूद ये पार्टियां आपसी एकजुटता की कोशिश नहीं कर रहीं। इस लिहाज से कांग्रेस की ओर से भी कोई पहल नहीं हो रही। तृणमूल कांग्रेस के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी ने ‘पत्रिका’ से बातचीत में कहा कि अब इस मामले पर उनकी पार्टी की मंगलवार की रणनीति लोकसभा अध्यक्ष के रवैये पर निर्भर करेगी। साथ ही उन्होंने माना कि कांग्रेस या किसी और दल की ओर से विपक्षी एकजुटता की कोशिश नहीं की गई है। इसी तरह कांग्रेस के लोकसभा के नेता अधीर रंजन चैधरी भी इस मामले पर सिर्फ इतना ही कहते हैं कि जब तक इस मामले पर सरकार जवाब नहीं देती। पार्टी का अपने स्तर पर विरोध जारी रहेगा।

विरोध में बिखरा रहा विपक्ष

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी दल, सपा, बसपा, आप सहित अधिकांश विपक्षी दल इस मामले पर सरकार को घेरने में जुटे हैं, लेकिन इन दलों में कोई फ्लोर कोर्डिनेशन नहीं है। यहां तक कि सोमवार को संसद परिसर में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और आप ने इसी मुद्दे पर धरने प्रदर्शन भी अलग-अलग ही किए।

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विपक्ष मन बनाए तो सरकार बहस के लिए तैयार

मोदी सरकार में शीर्ष स्तर पर यह तय किया गया है कि वह इस मामले पर संसद में दबाव में नहीं आएगी। जानकारी के मुताबिक जब तक मामला पूरी तरह शांत नहीं हो जाता तब तक संसद में चर्चा का कोई मतलब नहीं है। विपक्ष की ओर से गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग को भी सत्ताधारी पार्टी ने विपक्ष की पैंतरेबाजी करार दिया है। सरकारी पक्ष का कहना है कि अगर विपक्ष सदन की कार्यवाही चलाने को तैयार हो जाएगा तो गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर अपनी ओर से बयान दे सकते हैं।

सदन में बीजेपी कर रही है कांग्रेस को घेरने की रण्नीति पर काम

भाजपा की ओर से इस बात की भी तैयारी है कि अगर संसद में विपक्ष इस मामले को ज्यादा तुल देता है तो वह मुसलमानों को भड़काने में कांग्रेस की भूमिका को जोर-शोर से उठाएंगे। इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषणों को उछाला जाएगा।