Bihar: सीएम नीतीश कुमार को जातीय जनगणना पर मिला BJP का साथ, 10 पार्टियों के नेता पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

Caste Census: बिहार के सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में 10 दलों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मुलाकात करने वाले हैं। भाजपा की ओर से इस प्रतिनिधिमंडल में बिहार सरकार में मंत्री जनक राम शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि इस प्रतिनिधिमंडल में जदयू से शिक्षा मंत्री विजय चौधरी भी शामिल होंगे।

By: Anil Kumar

Updated: 21 Aug 2021, 09:09 PM IST

पटना। जातीय जनगणना (Caste census) को लेकर लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है। जातीय जनगणना की मांग के संबंध में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को अब विपक्षी दलों के साथ-साथ भाजपा का भी समर्थन मिल गया है। दरअसल, जातीय जनगणना की मांग को लेकर सोमवार (23 अगस्त) को 10 दलों का एक प्रतिनिधिमंडल पीएम मोदी से मुलाकात करने वाले हैं, इसमें भाजपा के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक, बिहार के सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में 10 दलों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुबह 11 बजे मुलाकात करने वाले हैं। भाजपा की ओर से इस प्रतिनिधिमंडल में बिहार सरकार में मंत्री जनक राम शामिल होंगे। बीजेपी नेतृत्व ने दोनों उपमुख्यमंत्रियों की जगह मंत्री जनक राम को प्रतिनिधि मंडल में भेजने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि इस प्रतिनिधिमंडल में जदयू से शिक्षा मंत्री विजय चौधरी भी शामिल होंगे।

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भाजपा औऱ जदयू के प्रतिनिधि के अलावा बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा, CPIML से महबूब आलम, AIMIM से अख्तरुल इमान, पूर्व सीएम और HAM के अध्यक्ष जीतन राम मांझी, VIP प्रमुख और मंत्री मुकेश सहनी भी शामिल होंगे। इन सभी के अलावा CPI की ओर से सूर्यकांत पासवान और CPM के अजय कुमार समेत 11 नेता शामिल होंगे।

केंद्र सरकार नहीं चाहती जातीय जनगणना

आपको बता दें कि नीतीश कुमार समेत कई नेता लगातार जातीय जनगणना कराए जाने की मांग केंद्र सरकार से करते रहे हैं। बीते दिनों संसद के मानसून सत्र में भी जातीय जनगणना कराए जाने को लेकर मांग उठाई गई थी।
इसपर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में कहा था कि केंद्र जाति के अनुसार जनसंख्या की गणना नहीं करेगा। इसपर नीतीश कुमार ने फिर से दोहराते हुए कहा था कि केंद्र सरकार अपने फैसले पर दोबारा विचार करें।

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मालूम हो कि संसद के मानसून सत्र में ओबीसी आरक्षण से जुड़े एक बिल को सर्वसम्मति के साथ पास कराया गया था। अब इस कानून के बनने के बाद से सभी राज्य अपने-अपने आधार पर ओबीसी की लिस्ट तैयार कर सकते हैं। हालांकि, अभी भी आरक्षण की 50 फीसदी सीमा बरकरार है। ऐसे में विपक्षी दलों ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि इसे खत्म किया जाए, अन्यथा ओबीसी की लिस्ट तैयार करने वाले कानून की उपयोगिता खत्म हो जाएगी।

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