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हामिद अंसारी के ‘हिंदू अतिवाद’ वाले बयान पर इमाम संगठन की प्रतिक्रिया, मुस्लिमों को लेकर कही ये बात

Hamid Ansari Hindu extremism RSS: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के ‘हिंदू अतिवाद’ और आरएसएस से जुड़े बयान पर AIIA अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुसलमानों को भारत में बाहरी महसूस नहीं करना चाहिए। उन्होंने नफरत फैलाने वाले बयानों पर कार्रवाई की मांग की और कहा कि देश में सभी समुदायों के बीच सद्भाव और भाईचारा जरूरी है।
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भारत

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Ashib Khan

Sep 20, 2026

bjp spokesperson dinesh pratap singh hit back at hamid ansari statement

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी (Photo-IANS)

Hamid Ansari Muslim Remarks: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की ओर से ‘हिंदू अतिवाद’ और आरएसएस को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम इमाम उमेर अहमद इलियासी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का इस तरह इस्तेमाल करके और उन्हें भड़काने या उकसाने के उद्देश्य से बयान देकर, ऐसा प्रतीत होता है कि वह देश के माहौल को बिगाड़ने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।

इलियासी ने आगे कहा कि हामिद अंसारी का विवादित बयान देने का पुराना इतिहास रहा है। जब वे सत्ता में थे और महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर थे, तब वे धर्मनिरपेक्षता की बात करते थे। अब उन्हें मुस्लिम समुदाय की याद आ रही है। चूंकि मुस्लिम समुदाय में उनकी पकड़ या प्रभाव इतना कम हो गया है कि अब कोई उनकी सुध लेने भी नहीं आता, इसलिए संभवतः उन्हें लगा कि इस मुद्दे पर राजनीति करके अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की जरूरत है।

साजिद रशिदी ने भी दी प्रतिक्रिया

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) के अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमानों को खुद को बाहरी या अलग-थलग महसूस नहीं करना चाहिए। साथ ही उन्होंने किसी भी समुदाय को निशाना बनाने वाले बयानों पर कार्रवाई की मांग की।

राशिदी ने इस दौरान हामिद अंसारी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब हामिद अंसारी उपराष्ट्रपति के पद पर थे, तब मुसलमानों के पक्ष में उनके बहुत अधिक बयान सामने नहीं आए। उन्होंने कहा कि पद से हटने के बाद उनके कई बयान सामने आए हैं और ऐसा लगता है कि अब वह खुद को मुसलमानों के नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं।

AIIA के अध्यक्ष ने कहा कि संवैधानिक पदों पर रहने वाले लोगों को समाज के सभी वर्गों के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे मुद्दे पद छोड़ने के बाद ही क्यों उठाए जा रहे हैं।

‘नफरत पैदा होने पर अतिवाद गलत’

अतिवाद को लेकर राशिदी ने कहा कि इसे इस आधार पर देखा जाना चाहिए कि क्या किसी विचार या गतिविधि से दूसरे लोगों के प्रति नफरत पैदा होती है। उन्होंने कहा कि अतिवाद तब गलत हो जाता है, जब उसमें दूसरों के प्रति नफरत शामिल हो। अगर कोई व्यक्ति अपने धर्म का पालन करता है और दूसरों को परेशान नहीं करता, तो यह अलग बात है।

‘हमें भारतीय होने पर भी गर्व है’

इस दौरान राशिदी ने भारत में मुसलमानों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय मुसलमानों ने भारत को चुना और देश के निर्माण में योगदान दिया। हमें मुसलमान होने पर गर्व है, लेकिन इससे भी ज्यादा गर्व इस बात पर है कि हम भारत में रहते हैं।

राशिदी ने कहा कि ऐसे बयान जिनसे यह संकेत मिलता है कि मुसलमान भारत के नहीं हैं, समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर सकते हैं। उन्होंने राजनीतिक संगठनों और नेताओं से ऐसे बयानों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की।

उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम मुद्दों से जुड़े बयानों का भी जिक्र किया और कहा कि समाज के सभी वर्गों को सद्भाव और भाईचारे के संदेश को अपनाना चाहिए।