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2019: पश्चिम बंगाल में सीएम ममता बनर्जी के रुख से कांग्रेस की बेचैनी बढ़ी, राहुल पेरशान

ममता को अपनी आक्रामकता दायरे में रहना होगा ताकि भाजपा को पश्चिम बंगाल में ध्रुवीकरण का दांव चलने का मौका न मिले।

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Dhirendra Kumar Mishra

Aug 01, 2018

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2019: पश्चिम बंगाल में सीएम ममता बनर्जी के रुख से कांग्रेस की बेचैनी बढ़ी, राहुल पेरशान

नई दिल्ली। असम में एनआरसी लागू होने के बाद से देश की राजनीति में नया उबाल आ गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी का इस मुद्दे पर तेवर सबसे ज्‍यादा सख्‍त है। उन्‍होंने गृह युद्ध तक की धमकी दे डाली है। अमित शाह ने उनके इस तेवर को देखते हुए पलटवार किया है और पश्चिम बंगाल में भी एनआरसी लागू करने के संकेत दिए हैं। दूसरी तरफ ममता बनर्जी के उग्र तेवर से कांग्रेस चिंतित हो उठी है। उसे टीएमसी के इस रुख ने लगने लगा है कि कहीं लोकसभा चुनाव में उसका नुकसान न हो जाए।

कांग्रेस को नुकसान की आशंका
सीएम ममता के रुख से पश्चिम बंगाल में वोट पोलराइजेशन की संभावनाओं को बल मिला है। अगर ऐसा हुआ तो वहां का मामला पूरी तरह से टीएमसी बनाम भाजपा हो जाएगा और कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में निराशा हाथ लग सकती है। दूसरी बात ये है ममता का आक्रामक रवैया जारी रहने पर महागठबंधन के विस्‍तार को झटका लग सकता है। क्षेत्रीय दल ममता के पाले में जा सकते हैं। वैसे भी क्षेत्रीय दलों ने राहुल गांधी को अभी तक ज्‍यादा तवज्‍जो नहीं दी है। फारुक अब्‍दुल्‍ला के प्रयासों के बावजूद भी किसी ने महागठबंधन में अभी तक ज्‍यादा रुचि नहीं दिखाई है। इसी आशंका को देखते हुए कांग्रेस के रणनीतिकार दीदी को एनआरसी मुद्दे पर परिपक्व रणनीति अपनाने का संदेश देने की कोशिश में जुट गए हैं।

समझदारी से कदम उठाए टीएमसी
एनआरसी के मुद्दे पर कांग्रेस के नेताओं ने ममता दीदी से इस मसले पर सीधे बात करने की बजाय उनके सिपहसालारों के जरिए संदेश दिया है। पार्टी सूत्रों ने कहा कि भाजपा नेता जिस तरह से एनआरसी से बाहर हुए सभी 40 लाख लोगों को मुस्लिम घुसपैठिया साबित करने में लगे हैं उससे साफ है कि अमित शाह केवल पूर्वोत्तर ही नहीं पूरे देश में सियासी ध्रुवीकरण का दांव खेलने से वह परहेज नहीं करेगी। जबकि इन 40 लाख में से 17 लाख लोग हिंदू समुदाय के हैं।

अमित शाह झुकने को तैयार नहीं
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राज्यसभा में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने तेवरों से पार्टी के इन इरादों को जाहिर करने में हिचक नहीं दिखाई। इसलिए ममता को एनआरसी पर अपनी बात बेशक पुख्ता तरीके से रखना चाहिए मगर संयम रखना भी उतना ही अहम है। इस बात का ख्‍याल रखना चाहिए कि भाजपा टीएमसी के उग्र तेवल का लाभ न उठा ले। कांग्रेस नेताओं की राय है क टीएमसी प्रमुख को एनआरसी पर गृह युद्ध होने की आशंका जैसी टिप्पणी करने की जल्दबाजी दिखाने से भी बचने की जरूरत है। कांग्रेस रणनीतिकारों की नजर में ममता ने कोलकाता की प्रेस कांफ्रेंस में एनआरसी मसौदे के बाद सामने आई गंभीर चुनौतियों पर वाजिब बातें उठाई। कांग्रेस का यह भी कहना है कि ममता यह न भूलें कि इन 40 लाख अवैध लोगों में 17 लाख हिंदू हैं। हालांकि ममता ने बांग्लाभाषी और बिहारी आदि होने की बात भी उठाई मगर उनकी चिंताओं से ज्यादा उनके तेवर सियासी सुर्खियों में हैं।