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भाजपा का कांग्रेस मुक्त भारत का जुमला भी औंधे मुंह गिरा

राहुल गांधी 11 दिसंबर 2017 को कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे और एक साल के अंदर ही उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है।

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Rahul Gandhi

भाजपा का कांग्रेस मुक्त भारत का जुमला भी औंधे मुंह गिरा

लंबे समय से भाजपा नेता कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते आ रहे हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी कुछ महीने पूर्व तक इस सपने को करीब-करीब सच में बदलने में कामयाब होती नजर आ रही थी। कांग्रेस अधिकांश विधानसभा चुनाव हार गई और उसके भविष्य पर सवालिया निशान लगने लगे। लेकिन राहुल गांधी बार-बार यही कहते रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कांग्रेस मुक्‍त भारत का सपना कभी पूरा नहीं होगा। हुआ भी कुछ एसा ही। गुजरात और गोवा में भले ही भाजपा की सरकार बनी हो, मगर कांग्रेस का प्रदर्शन सराहनीय रहा। उसके बाद कर्नाटक और अब पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम भी राहुल गांधी की बात पर मुहर लगाते हैं कांग्रेस मुक्त भारत का मोदी का सपना फिलहाल तो पूरा होता नजर नहीं आता।

क्या गांधी जी चाहते थे कांग्रेस मुक्त हो भारत?

भाजपा नेता अकसर कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते रहते हैं। इस संबंध में फरवरी के महीने में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वह महात्मा गांधी के कांग्रेस मुक्त भारत के सपने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। तो क्या गांधी जी सचमुच चाहते थे कि कांग्रेस को भंग कर दिया जाए? इस संबंध में राजनीति विज्ञानी लॉयड और सूज़न रुडोल्फ़ का कहना है कि अपनी हत्या के सिर्फ 24 घंटे पहले ही गांधीजी ने अपने वसीयतनामे में इस बात का प्रस्ताव किया था कि कांग्रेस को भंग करके उसकी जगह लोकसेवक संघ की स्थापना की जानी चाहिए। यह संघ आम जनता की बेहतरी के लिए काम करेगा। हालांकि ‘उनकी अंतिम इच्छा और वसीयतनामा’ शीर्षक से हरिजन में गांधी जी का एक वक्तव्य प्रकाशित हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सबसे पुराना राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन है, इसने अहिंसक संघर्ष के जरिए आज़ादी की लड़ाई जीती है। इसे ख़त्म करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. यह सिर्फ़ राष्ट्र के साथ ही ख़त्म होगा।

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संघ प्रमुख ने कहा कांग्रेस मुक्त भारत लक्ष्य नहीं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पुणे में दिए अपने एक भाषण में कहा था कि कांग्रेस मुक्त भारत जैसे नारे राजनीतिक मुहावरे हैं और ये संघ की भाषा का हिस्सा नहीं हैं। संघ प्रमुख ने कहा था कि संघ राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अपने विरोधियों को भी शामिल करना चाहता है।