
नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस ( coronavirus ) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक जानलेवा वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 850 के पार पहुंच चुकी है। यही वजह है कि देशभर में लॉकडाउन ( Lock Down ) का ऐलान किया गया है। देश में लॉकडाउन का शनिवार को चौथा दिन है। इस बीच जो बड़ी खबर सामने आ रही है वो ये कि अफगानिस्तान में फंसे देशवासियों को लेकर दिग्गज नेता ने एयरलिफ्ट करने की इच्छा जताई है।
शिरोमणि अकाली दल ( Shiromani akali dal ) के अध्यक्ष व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ( Sukhbir singh badal ) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Modi ) से अफगानिस्तान ( Afghanistan ) में फंसे उन सिखों की तत्काल एयरलिफ्टिंग ( Airlift ) का प्रबंध करवाने के लिए कहा है जो अपने देश वापस आने के इच्छुक हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में बादल ने आग्रह किया है कि काबुल में भारतीय दूतावास के अधिकारियों , पंजाबियों खासतौर पर सिख नेताओं के साथ इस संबध में समन्वय स्थापित करने के लिए कहे।
बादल ने कहा कि काबुल में बड़ी संख्या में सिख परिवार रहते हैं जो जल्द से जल्द देश लौटना चाहते हैं। उन परिवारों को एयरलिफ्ट कर वापस अपने देश लाने के लिए तत्काल शीघ्र व्यवस्था करने की आवश्यकता है।
अकाली दल अध्यक्ष ने लिखा है कि कोरोना वायरस के विरूद्ध वैश्विक स्तर पर चल रही लड़ाई के कारण वह सरकार पर पड़े दबावों के बारे पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन समूचा शांतिप्रिय और देशभक्त सिख समुदाय आपकी तरफ नजरे गढ़ाए बैठा है। जहां भी सिखों को कोई संभावी खतरा है, आप उनकी सुरक्षा सुनिश्चित बनाने के लिए कदम उठाएं।
सिखों को बनाया जा सकता है निशाना
बादल सिखों को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि सिखों दुनियाभर में कभी भी निशाना बनाया जा सकता है। बादल ने पीएम मोदी से अनुरोध किया है कि वह न सिर्फ अफगानिस्तान के सिखों की नहीं बल्कि उन सभी संवेदनशील देशों में रहते सिखों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधा संपर्क करें। जिन्हें कभी भी निशाना बनाया जा सकता है।
कूटनीतिक चैनलों का करें इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि यह बेहद नाजुक स्थिति है और देश को विदेशों में रहते सिखों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए सभी कूटनीतिक चैनलों का इस्तेमाल करने की जरूरत है।
लगातार आ रहे फोन
बादल ने कहा कि उन्हें अफगानिस्तान तथा बाकी देशों में रहते बहुत सारे सिखों के फोन आए हैं, जो कि अपनी सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा तेज कूटनीतिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।