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फ्रांस: दासू एविएशन के CEO का वीडियो आया सामने, रफाल सौदा हमारे लिए बड़ी सफलता

2015 में पीएम मोदी जब फ्रांस की यात्रा पर गए थे तब फ्रांस्वा ओलांद ही राष्ट्रपति थे। उन्हीं के साथ रफाल विमान का करार हुआ था।

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Dhirendra Kumar Mishra

Sep 23, 2018

rafal

फ्रांस: दासू एविएशन के CEO का वीडियो आया सामने, रफाल सौदा हमारे लिए बड़ी सफलता

नई दिल्ली। रफाल सौदा को लेकर कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी पीएम मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। उनका कहना है कि इस सौदे में घोटाला हुआ है। दूसरी तरफ भाजपा भी राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करने में जरा सा भी पीछे नहीं है। भाजपा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार की जननी है। इस सौदे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच फ्रांस में पीएम मोदी द्वारा रफाल डील करने से करीब 17 दिन पहले दासू के सीईओ एरिक ट्रैपियर का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में सीईओ भारतीय वायुसेना प्रमुख और एचएएल अध्यक्ष की मौजूदगी में कह रहे हैं कि यह सौदा अंतिम चरण में है। बहुत जल्‍द करार पर दोनों देशों के बीच हस्‍ताक्षर हो जाएंगे।

ट्रैपियर ने करार को बताया बड़ी सफलता
दासू के सीई ओ एरिक ट्रैपियर इस वीडियो में कह रहे हैं कि इस करार के साथ एक बेहतर भविष्य निर्माण की बात भी हमारे मन में है। प्रसिद्ध एमएमआरसीए कार्यक्रम और 2007 में जारी आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) के कारण हमें करार को पाने में बड़ी सफलता मिली है। वह इस बात का भी जिक्र कर रहे हैं कि 2012 में रफाल का चुनाव प्रतिस्पर्धा की मांग के बाद किया गया था। इस करार के बाद आप मेरी सफलता और खुशियों को समझ सकते हैं। वह कह रहे हैं कि आईएएफ प्रमुख कॉम्बेट प्रूवेन एयरक्राफ्ट विमान चाहते हैं। उनकी चाहत के हिसाब से रफाल सबसे बेहतर विकल्‍प हो सकता है। हम इस पर हस्ताक्षर करेंगे क्योंकि अगला कदम तार्किक होना चाहिए। साथ ही उन्‍होंने कहा कि इस बारे में एचएएल चेयरमैन का कहना है कि इस प्रतियोगिता के नियमों के अनुरूप होने के लिए आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) के साथ अपनी जिम्मेदारियों को साझा करने और अनुपालन करने के लिए हम सहमत हैं। मुझे दृढ़ विश्वास है कि इस अनुबंध को अंतिम रूप जल्द दे दिया जाएगा और इस पर हस्ताक्षर भी जल्द हो जाएगा।

रफाल के उत्‍पादन को लेकर मतभेद
सरकारी अधिकारियों से मिली खबरों के आधार पर आपको बता दें कि तीन दिन पहले रफाल सौदे पर उस समय हंगामा उठ खड़ा हुआ जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने एक साक्षात्‍कार में बताया कि अनिल अंबानी के रिलायंस का नाम उन्हें भारत सरकार ने सुझाया था। उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। ओलांद के खुलासे के बाद एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। यूपीए सरकार जब पहली बार फ्रांस की कंपनी दासू एविएशन से रफाल विमानों की खरीद को लेकर बातचीत कर रही थी तभी हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटिड (एचएएल) और दासू के बीच भारत में इन जंगी विमानों के उत्पादन को लेकर गंभीर मतभेद थे।