
सुनेत्रा पवार (Photo: IANS)
महाराष्ट्र में इस सप्ताह हुए 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनावों की मतगणना चल रही है। भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन रुझानों में जीत रहा है, जिसमें भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद राज्य में यह पहला बड़ा चुनाव था और इसे उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार की राजनीतिक अग्निपरीक्षा माना जा रहा था। अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी की जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार के कंधों पर आई है। पार्टी के कहने पर ही सुनेत्रा पवार ने हाल ही में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली और फिलहाल वह सियासी तौर पर सक्रिय नहीं है। खास बात यह है कि सुनेत्रा पवार ने इन चुनावों के लिए प्रचार नहीं किया, इसके बावजूद पुणे की जनता ने उनके नेतृत्व के पक्ष में स्पष्ट समर्थन दिया है। जिस वजह से पुणे जिला परिषद में एनसीपी (अजित पवार) नंबर वन पार्टी बन गई है।
पुणे जिला परिषद में एनसीपी ने सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। कुल 73 सीटों में से 55 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं, जिनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 39 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। चुनाव परिणामों के मुताबिक भाजपा को 8 सीटें, शिवसेना को 4 सीटें, शरद पवार गुट को 1 सीट और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) को 3 सीटें मिली हैं। वहीं कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों का खाता नहीं खुल सका। इन नतीजों के साथ पुणे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सत्ता तय मानी जा रही है।
पंचायत समितियों के चुनावों पर भी अजित पवार की एनसीपी का प्रदर्शन अच्छा रहा है। एनसीपी 20 से ज्यादा पंचायत समितियों में आगे है और सीटों के लिहाज से भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बाद तीसरे स्थान पर है। खासकर बारामती, इंदापुर, अंबेगांव, मावल, शिरूर, हवेली, जुन्नार, दौंड, पुरंदर और भोर पंचायत समितियों में एनसीपी सुबह से ही बढ़त बनाए हुए है। वहीं खेड़, मुलशी और वेल्हा पंचायत समितियों में महायुति के सहयोगी दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
खासतौर पर पुणे के मावल तालुका में एनसीपी ने जबरदस्त ताकत दिखाई है। यहां पार्टी सभी 5 जिला परिषद और 10 पंचायत समिति सीटों पर जीत की ओर बढ़ती नजर आ रही है। कुल मिलाकर, नतीजों ने साफ कर दिया है कि अजित पवार के निधन के बाद भी पुणे और खासतौर पर बारामती में उनकी एनसीपी का राजनीतिक दबदबा कायम है और सुनेत्रा पवार की पहली सियासी परीक्षा सफल रही है।
राज्य में शनिवार को 12 जिला परिषदों के 731 सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान हुआ था। इनमें रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सातारा, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर जिले शामिल हैं। इसके साथ ही इन जिलों के अंतर्गत आने वाली 125 पंचायत समितियों की 1,462 सीटों के लिए भी वोट डाले गए।
जिला परिषद चुनावों में कुल 2,624 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि पंचायत समिति चुनावों में 4,814 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मतगणना के साथ ही अलग-अलग जिलों से रुझान लगातार सामने आ रहे हैं।
इन चुनावों को एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित एकीकरण के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। पिछले दो वर्षों की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दरकिनार करते हुए दोनों गुटों ने पुणे, सातारा, सोलापुर और सांगली में स्थानीय निकाय चुनाव अनौपचारिक गठबंधन के तहत लड़े थे। इन क्षेत्रों में दोनों पक्षों के उम्मीदवार मूल चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ के साथ मैदान में उतरे थे।
Updated on:
09 Feb 2026 04:11 pm
Published on:
09 Feb 2026 04:00 pm
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