
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून ( CAA ) के खिलाफ केरल विधानसभा में पारित एक प्रस्ताव को केरल राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अवैध करार दिया है। उन्होंने कहा है कि इस प्रस्ताव की कोई कानूनी या संवैधानिक वैधता नहीं है, क्योंकि नागरिकता संशोधन कानून केंद्रीय विषय है। इस विषय पर कानून बनाने को केंद्र सरकार को संवैधानिक अधिकार है।
एक दिन पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ केरल विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव को असंवैधानिक बताया था। रविशंकर प्रसाद ने संविधान के अनुच्छेद 245 और 246 और 256 का हवाला देते हुए कहा था कि केरल विधानसभा का प्रस्ताव गलत है और संविधान की भावनाओं के खिलाफ है।
कानून मंत्री ने कहा था कि यह हैरान करने वाली बात है कि जिस सरकार ने संविधान की शपथ ली है, वह गैर संवैधानिक बात कर रही है। नागरिकता संशोधन कानून राज्य में नहीं लागू होने देंगे। यह कानून संसद द्वारा पारित है।
किसी को नागरिकता देना या लेना संविधान की सातवीं अनुसूची का विषय है। इस पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद को है। संसद नागरिकता संबंधी किसी विषय पर कानून बना सकती है।
कानून मंत्री ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 256 के तहत राज्य की शासकीय शक्ति इस तरह उपयोग में लाई जाएगी कि संसद द्वारा पारित कानून को लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र के कानून को लागू करना राज्य सरकारों का संवैधानिक दायित्व है जो राज्य सरकारें ऐसे प्रस्ताव पारित कर रही हैं या पारित करने की बात कर रही हैं वो संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन कानून पर लागू नहीं होंगे। इस मसले पर राज्य सरकारों को कानूनी सलाह लेना चाहिए।
बता दें कि केरल विधानसभा ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था, जिसका मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की अगुवाई वाले वाम मोर्चा और कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा ने भी समर्थन किया था। बीजेपी ने इसका कड़ा विरोध किया था। केरल के 140 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी का सिर्फ एक विधायक है।
Updated on:
02 Jan 2020 08:52 pm
Published on:
02 Jan 2020 02:20 pm
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