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PM Modi Cabinet Reshuffle के पांच बड़े सरप्राइज

मोदी 2.0 सरकार में बुधवार को प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल किए और कुल 43 को मंत्री पद की शपथ दिलाई। हालांकि इस दौरान पांच बड़े सरप्राइज भी सामने आए, जिन्हें जानना बेहद जरूरी है।
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नई दिल्ली

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Amit Kumar Bajpai

•

Updated: 7 Jul 2021, 9:02 PM IST

Here are 5 Big surprises in PM Modi Cabinet Reshuffle

Here are 5 Big surprises in PM Modi Cabinet Reshuffle

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट विस्तार की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया बुधवार को पूरी की गई। मई 2019 में दूसरे कार्यकाल के लिए पदभार ग्रहण करने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंत्रिपरिषद में यह पहला फेरबदल हुआ। हालांकि इस दौरान पीएम मोदी ने कई प्रमुख मंत्रियों के इस्तीफे से लेकर नए चेहरों को शामिल करने तक कई अप्रत्याशित कदम उठाए।

कैबिनेट में फेरबदल में पीएम मोदी जहां युवा चेहरों को ला रहे हैं और विभिन्न सामाजिक समूहों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दे रहे हैं, वहीं उन्होंने कुछ पुराने दिग्गजों को उनके पिछले पदों से और ऊंचाई पर पहुंचा दिया गया है। ऐसे में इस कैबिनेट फेरबदल के सबसे बड़े पांच आश्चर्य यहां दिए जा रहे हैं:

1. हर्षवर्धन, रविशंकर प्रसाद समेत अन्य का इस्तीफा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल "निशंक" और रसायन और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा जैसे प्रमुख नाम उन केंद्रीय मंत्रियों में शामिल थे, जिन्होंने बुधवार शाम को कैबिनेट फेरबदल से पहले इस्तीफा दे दिया। कोरोना की दूसरी विनाशकारी लहर में नागरिकों को ऑक्सीजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तड़पते देखे जाने के बाद विपक्षी दलों की आलोचना का शिकार स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को बनना पड़ा। खुद एक डॉक्टर हर्षवर्धन स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के के प्रभारी के रूप में काम कर रहे थे जब देश में कोरोना महामारी टूट पड़ी और फिर भारत ने टीके विकसित करने के लिए काम किया।

वहीं, रविशंकर प्रसाद सरकार के नए आईटी नियमों की अगुवाई कर रहे थे, जिसके लिए सरकार ट्विटर के साथ आमने-सामने है। प्रकाश जावड़ेकर का इस मंत्रालय से जाना भी अप्रत्याशित था, क्योंकि वे सरकार के प्रवक्ता भी थे।

2. ज्योतिरादित्य सिंधिया की एंट्री

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बार और पहली बार एनडीए नेता के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल में वापसी की है। मार्च 2020 में, सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस के 22 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए, जिससे मध्य प्रदेश में तत्कालीन कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई, जिसने भाजपा के फिर से सत्ता में लौटने का मार्ग प्रशस्त
किया।

सिंधिया ने उन अटकलों पर चुप्पी साधे रखी कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान शामिल किया जा सकता है और कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

3. चिराग के गुस्से के बीच पशुपति पारस को शामिल करना

एनडीए की लोक जनशक्ति पार्टी के पशुपति पारस भी मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं, जिससे उनके भतीजे चिराग पासवान ने
नाराजगी जताई। चिराग पासवान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि वह पारस को लोजपा के कोटे के आधार पर अपने मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में नियुक्त न करें। लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद, पार्टी में भी विभाजन के बीच, यह स्थान खाली हो गया था।

चिराग ने कहा था, “उन्हें [पशुपति पारस] को लोजपा कोटे पर केंद्रीय मंत्री बनाना संभव नहीं है क्योंकि पार्टी के कार्यकारी बोर्ड ने उन्हें निष्कासित कर दिया है। मैंने प्रधानमंत्री को पत्र के माध्यम से सूचित किया है। अगर उन्हें नियुक्त किया जाता है, तो मैं अदालत जाऊंगा।”

4. कई को मिला प्रमोशन

केंद्रीय मंत्रिमंडल के सात राज्य और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री भी पदोन्नति पाने में कामयाब रहे। इनमें हरदीप सिंह पुरी, अनुराग ठाकुर, किशन जी रेड्डी उन व्यक्तियों में शामिल हैं जिन्होंने नई मंत्रिमंडल में शपथ ली है।

5. सर्बानंद सोनोवाल को शामिल करना

इस साल हुए असम चुनाव, जिसके बाद भाजपा ने फिर से सरकार बनाई थी, पूर्व सीएम सर्बानंद सोनोवाल के केंद्रीय पद में शामिल होने की अटकलों के बीच हिमंत बिस्वा सरमा को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। सोनोवाल को अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।