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परीक्षा में बैठे सिर्फ 23 बच्चे

जिलेभर से एक ही स्कूल के बच्चों ने लिया हिस्सा

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खंडवा

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Rahul Singh

Jan 21, 2019

Hindi Olympiad Exam

Hindi Olympiad Exam

खंडवा. शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में रविवार को हिंदी ओलंपियाड परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए कक्षा 7वीं और 8वीं के बच्चों के लिए रखी गई थी। इस परीक्षा का आयोजन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हिंदी ओलंपियाड के माध्यम से छात्रों में राष्ट्रभाषा के प्रति सम्मान, हिंदी की पाठ्य पुस्तकों से लगाव, पढऩे के प्रति रूचि जागृत करने के साथ ही बच्चों के ज्ञान में वृद्धि करने, तर्क शक्ति बढ़ाने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आदि के उद्देश्य से किया जाता है।
लेकिन खंडवा में हिंदी ओलंपियाड परीक्षा सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गई। परीक्षा में एक ही स्कूल के सिर्फ 23 बच्चे शामिल हुए। शहरीय क्षेत्र के एक भी बच्चे ने परीक्षा में हिस्सा नहीं लिया। परीक्षा में बच्चों के शामिल नहीं होने की बात पर जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा हिंदी ओलंपियाड परीक्षा के प्रति बच्चों में रूझान नहीं था। इसलिए ज्यादा बच्चे शामिल नहीं हो सके।


हिंदी के प्रति विभाग ही नहीं ले रहा रूचि
हिंदी ओलंपियाड परीक्षा होने की तारीख तय होने के बाद से जिला शिक्षा विभाग ने परीक्षा को गंभीरता से नहीं लिया। विभागीय सूत्र बताते है कि शहरीय सहित ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों को परीक्षा के संबंध में जानकारी नहीं दी गई और न ही परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी कारण नजीता है कि परीक्षा में सिर्फ 23 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस विद्यार्थियों ने भी स्कूल के शिक्षक की रूचि के चलते परीक्षा में हिस्सा लिया है।


जो शामिल उन्हें भी नहीं पता क्यों होती है परीक्षा
हिंदी ओलंपियाड परीक्षा देने के लिए ग्राम पिपलिया फूल स्थित शासकीय स्कूल के 23 बच्चे पहुंचे। उन्होंने दोपहर 12 से सवा 2 बजे तक परीक्षा में पर्चा हल किया। बच्चे परीक्षा हाल से बाहर निकले। जब उनसे परीक्षा के संबंध में बातचीत की गई तो एक दो बच्चों को छोड़ दे तो किसी को भी यह पता नहीं था कि हिंदी ओलंपियाड परीक्षा होती क्यों है। बच्चों ने कहा सर ने आवेदन भरवाए थे। आवेदन भरने के बाद सर ने कहा पेपर देने जाना है तो आ गए।


हिंदी ओलंपियाड परीक्षा को लेकर स्कूलों में जानकारी दी गई थी। मगर विद्यार्थियों में परीक्षा के प्रति रूझान नहीं दिखा। इसी कारण ज्यादा बच्चों ने परीक्षा में हिस्सा नहीं लिया।
जेएल रघुवंशी, जिला शिक्षा अधिकारी, खंडवा