
बीयू में रिसर्च ने बनाई सस्ती ऑर्गेनिक खाद
भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शोधार्थी गोविंद गुप्ता ने लाभदायक जीवाणुओं पर शोध कर एक ऐसी खाद बनाई गई है, जो छोटे किसानों के लिए कम खर्च में उपलब्ध हो सकेगी। शोध में यह बात सामने आई किवर्तमान में जो खाद बाजार में उपलब्ध है वह महंगी होने के साथ ही फसलों की उत्पादकता में उतनी कारगर नहीं है। नए शोध में बनने वाली खाद बहुउपयोगी होगी।
शोधार्थी गोविंद गुप्ता का कहना है कि लगातार प्रयोग हो रहे रसायनिक खादों के कारण जमीन बंजर हो जाती है। इस खाद से जमीन की उर्वरक क्षमता में तो वृद्धि होगी, साथ ही फसल की पैदावार भी बढ़ेगी। इस खाद से जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा भी मिलेगा। अभी सीजन में किसानों को खाद के लिए इंतजार करना पड़ता है। जैविक खाद होने पर उन्हें इससे भी छूटकारा मिलेगा। वे घर ही उच्च क्वालिटी की खाद बना सकेंगे। इस शोध में विभाग के एचओडी डॉ. अनिल प्रकाश का मार्गदर्शन रहा। उन्होंने इस रिसर्च के लिए करीब तीन साल तक अलग-अलग जगहों पर रिसर्च की।
किसानों को नहीं लेना होगा कर्ज
गोविंद का कहना है कि जैविक खाद के प्रयोग से छोटे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा। अब तक मंहगा खाद खरीदने के लिए किसानो को कर्जा लेना पड़ता है लेकिन तैयार किए गए जैविक खाद के प्रयोग से कम कीमत मे अच्छी उपज मिल सकती है जिससे जमीन और इंसान का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और इसका कोई दुष्प्रभाव भी नही है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रयोगशाला में शोधार्थी ने होशंगाबाद क्षेत्र के विभिन्न गांवों से गेहूं की फसल की मिट्टी से लाभदायक जीवाणुओं को प्राप्त कर उन्हें प्रयोगशाला में उनका संवर्धन किया। प्रबल सूक्ष्म जीवाणु से तैयार किए गए जैविक खाद से निर्मित भाग में अन्य भाग की तुलना में कई अधिक घने आकार के पौधे प्राप्त हुए। डॉ. अनिल का कहना है कि गेंहू के बाद जल्द ही अन्य फसलों के लिए भी ऐसी ही खाद बनाने के लिए शोध किए जाएंगे।
Published on:
31 Dec 2018 02:14 pm
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